श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

और इस तरह से, तीन दिन और गुजरे हुए, वक़्त के रोजनामचे में दर्ज़ हो गए! वक़्त का ये रोजनामचा, न जाने कब से, वक़्त की तशबीह को, घुमाते हुए, लम्हा दर लम्हा, ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४ जिला अलवर, भिवाड़ी, राजस्थान की एक घटना! वो एक महापिशाच।

"तो बता दीजिये, कब आएं, ज़्यादा दूर भी नहीं है?" बोले वो,"मैं आपको फ़ोन पर बता दूंगा!" कहा मैंने,"जल्दी ही कोशिश कीजिये!" बोले वो,"हाँ जी, अब शाम हुई तो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

और इस तरह, वक़्त आगे बीतने लगा! अब वक़्त कहाँ रोके रुकता है! वक़्त तो बेलग़ाम घोडा है! जो थामे न थमे और रोके न रुके! उसके खुरों के नीचे, क्या हंसीं फूल और...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४ जिला अलवर, भिवाड़ी, राजस्थान की एक घटना! वो एक महापिशाच।

"तो बता दीजिये, कब आएं, ज़्यादा दूर भी नहीं है?" बोले वो,"मैं आपको फ़ोन पर बता दूंगा!" कहा मैंने,"जल्दी ही कोशिश कीजिये!" बोले वो,"हाँ जी, अब शाम हुई तो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

उसने देखा अपने पिता जी को! आँखें बंद और मुट्ठियां भींचे हुए! खून से लथपथ! वो चीख पड़ी! ऐसी तेज चीखी, कि घर के सभी लोग भी जाग गए! लप्पधप्प में दरवाज़ा खो...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

रचिता की हालत, खराब सी हो गई थी! बताए, तो कैसे बताए किसी को? न बताए तो छिपाए कैसे? थोड़ा आगे गए तो पिता जी दिखे! बोतल लिए हुए पानी की, दो दो! फौरन ही ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

इस तरह से, उनका भी दर्शन करने का सौभाग्य आया! और वे, अंदर, दरबार में चले! सब वैसा ही वैसा! चक्कर सा आने लगा था उसे तो! मनसा देवी के सामने आये! ठीक वैस...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

सामान वगैरह, सब रख दिया गाड़ी में! अंदर भी रखना ही था, टोकन लिया जाता, कतार में लगना पड़ता, बढ़िया हुआ था कि सामान रख दिया गया था! आज मंदिर में काफी भीड़ ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१४ जिला अलवर, भिवाड़ी, राजस्थान की एक घटना! वो एक महापिशाच।

"सड़क किनारे ही, आपका मतलब?" पूछा मैंने,"हाँ जी! हुआ ये कि पच्चीस आदमी कम से कम, कतार में बैठे थे, एक ही कतार में, जब उन पर गाड़ी की रौशनी पड़ी, तब भी कि...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

तो कार्यक्रम बन गया इतवार का! फ़ोन भी हो गया और वक़्त मुक़र्रर भी! इतवार सुबह, चोपड़ा साहब, आने वाले थे उनके घर और वे सब, संग ही चलने वाले थे फिर वहां से,...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

बुढ़िया तो नज़र ही न हटाए! उसको ही देखे! और रचिता, भय खाये उस से! वो बुढ़िया, कभी बाहर की तरफ देखे, कभी ज़मीन की तरफ! और कभी, उस रचिता की तरफ!"तू क्या कर ...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

"है न?'' पूछा उसने,"हाँ!" बोली वो,"दो लेलूं?" पूछा उसने,"हाँ!" बोली वो,दरअसल, सपने से बाहर न निकली थी रचित अभी! उसे, अभी तक, वो झिलमिलाते सितारे ही या...

2 years ago
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RE: वर्ष २०१५, दिल्ली के पास की एक घटना, रचिता के वो अंजान ख़्वाब!

करीब सात बजे वो लौटी वापिस! चाय-नाश्ता किया, और अपनी माँ से कुछ बातें कीं, उसका अपना कोचिंग-सेंटर था, उसी में, मसरूफ़ रहा करती थी! नौ बजे पहुंचना था उस...

2 years ago
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