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तो हम आ गए थे वापिस! आते ही हाथ-मुंह धोये, पानी पिया, सामान रखा, और फिर चारपाई पकड़ी! आज छत पर चारपाई लगाई गयी थी, दरअसल मैंने ही कहा था! अंदर कमरे में...
अभी कोई दस मिनट भी नहीं बीते थे कि रचिता के पिता जी का फ़ोन आ गया! मैं समझ गया कि ये बेचारे कितने दुखी हैं अपनी बेटी रचिता को लेकर! मैंने ज़्यादा कुछ नह...
वो लोप हो गया था! वैसे मैंने किसी बात पर खिन्न नहीं किया था उसे! न ही मेरी ऐसी कोई मंशा ही थी! लेकिन एक बात? जो मुझे अभी तक समझ नहीं आ रही थी! वो ये, ...
हालांकि, घर में कोई दिक्कत नहीं थी, किसी को भी कोई समस्या नहीं थी, लेकिन कौन चाहेगा कि घर किसी जिन्न की नज़रों में रहे! जिन्न से इंसान का लेना-देना ही ...
"यही है न कमरा उस लड़की का?" पूछा बाबा ने,"हाँ जी" बोले पिता जी,"हाँ, सजा रखा है!" बोले वो,"सजा?" पूछा हैरत से पिता जी ने,"हाँ! पीले फूल ही फूल!" बोले ...
वे दौड़े, दोनों ही, रचिता के कमरे की तरफ! कमर तो बंद था! उन्होंने दस्तक दी! एक बार, दो बार!"रचिता?" आवाज़ दी माँ ने,"रचिता?" पिता जी ने आवाज़ दी!दरवाज़ा, ...
तो मुझे यहां पर कच्चा, एकदम कच्चा लालच दिया जा रहा था! मैं सब जानता था, ये जितने भी हैं, इसी प्रकार प्रलोभन दिया करते हैं! यदि मैं हां कहता, तो भी क्य...
वे दौड़े, दोनों ही, रचिता के कमरे की तरफ! कमर तो बंद था! उन्होंने दस्तक दी! एक बार, दो बार!"रचिता?" आवाज़ दी माँ ने,"रचिता?" पिता जी ने आवाज़ दी!दरवाज़ा, ...
अचानक से, वो प्रेताग्नि लोप हो गयी! हुलारा भी बंद हो गया! और सामने से, ठीक ऐसी आवाज़ें आने लगीं जैसे दूर कहीं किसी पहाड़ी पर स्थिति, किसी मंदिर से, वज्र...
रोहतास ने बड़े ही मज़बूत यकीन के साथ ऐसा कहा था! सो लाजमी था कि, माँ-पिता जी की चिंता थोड़ी कम तो होती ही! तो वे, हाथ जोड़, और कुछ धन दे, निकल पड़े वापिस! ...
अगले दिन करीब दो बजे......पिता जी, लंच के बाद घर चले आये थे, दोपहर तक ही रहे थे दफ़्तर में, बेटी की चिंता में न सोने का होश था, न जागने का, न खाने का औ...
मुझे करीब एक घंटा लगा उधर, वो सब निबटाने में! अस्थि को अभिमंत्रित कर लिया था और अपनी कुछ आवश्यक विद्याएँ, जागृत कर ली थीं! इनके सहारे मैं अब उस शय से ...
घर पर, उसके पहुँचने से पहले ही पिता जी भी पहुँच चुके थे! जब उन्होंने धागे देखे तो होश ही उड़ गए! धागे तो जल चुके थे! छूते ही, राख हो गए थे! अब ये तो पक...
वे सब के सब उसी को देख रहे थे! पता नहीं क्या बात थी! उसकी नज़र फिर से पहाड़ी पर गई! और जब नीचे की, तो नींद खुल गई! ये कैसा अजीब सा ख़्वाब था? वे सब लोग क...
मैं आया वापिस गाड़ी तक! झट से गाड़ी में बैठा! सामान रखा पीछे, पानी की बोतल ली, और पानी पिया!"कुछ हुआ?'' पूछा उन्होंने,"यहां से निकलो!" कहा मैंने,"क्या?'...
