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वे बैठ गए थे वहीं साथ में ही, मायूस से, उन्हें मैंने कुछ नहीं बताया था, नहीं तो वो सच में ही बेहद डर जाते, और पता नहीं, कहीं इसी सोच में तनावग्रस्त हो...
"ये साया?" कहा मैंने,"यही तो?" कहा उन्होंने,"ये हमज़ाद नहीं!" कहा मैंने,"कैसे?" बोले वो,"शहह!" कहा मैंने,और उनकी बाजू पकड़, ले चला ज़रा सा पीछे, धीरे धीर...
तो हम उस रास्ते से कट लिए! अब हमें करीब तीस या पैंतीस किलोमीटर जाना था, चोमू, और चोमू से फिर देवठाला, इतिहास ने जैसे करवट ली थी पुनः! जैसे उसकी नींद ख...
और हम निकल पड़े घर के लिए! करीब आधे घंटे में वहां जा पहुंचे! घर में आये तो कोई निशान नहीं किसी की कोई आमद नहीं थी! सबकुछ वैसा ही था जिसे हम साधारण ही क...
"आओ सामने?" कहा मैंने,न, कोई नहीं!"बहुत हुआ खेल!" कहा मैंने,नहीं जी!"ऐसे नहीं आओगे?" बोला मैं,खिड़की भड़ाक से बंद हुई तभी!"मैं नहीं डरने वाला, बताओ, कौन...
तो साहब! हुई सुबह! हम उठे! नींद ही कहाँ लगी थी! नींद तो बस जैसे, देवठाला गाँव या स्थल या उस वास-स्थल में लगी थी! बार बार नज़र, कलाई पर जाती, कलाई पर बं...
"रोको?'' मैं चिल्ला ही पड़ा था!उन्होंने झट से ब्रेक लगाए औे एक तरफ, जहां कुछ बैरिकेड से लगे थे, गाड़ी रोक दी! जगह पर यातायात तो था, लेकिन ठहर कोई नहीं र...
और हम वहां से वापिस हुए फिर! अब हमारा गंतव्य था देवठाला! मैंने तो नामा ही जीवन में पहली बार सुना था इस जगह का! जाना तो दूर! ये स्थान, बाध-देवठाला कहला...
"फिर हुआ क्या था?" पूछा मैंने,"जी, कम से कम एक साल तक तो भनक ही न लगने दी!" बोले वो,''अच्छा?" पूछा मैंने,"हाँ जी!" बोले वो,"फिर?" पूछा मैंने,"एक दिन ल...
"परन्तु.....?" कहा मैंने,"क्या परन्तु?" बोला वो,ये सरल मानवीकरण था उसका! मेरे प्रत्येक शब्द से वे पहले से ही उसका अर्थ जान लेता था! ये उसका सामर्थ्य ह...
ये आवाज़? यही तो आवाज़ थी उस गैलरी में आई थी! जिसे मैंने, किसी वैक्यूम-क्लीनर की सी आवाज़ कहा था! ये आवाज़, बिलकुल इसी स्कूटी के स्टार्ट होने की थी! कमाल ...
"देखो, मुझे पता है तुम यहीं हो, आओ सामने?" कहा मैंने,कोई नहीं आया जवाब! हाँ, वो किताब ज़रूर गिर गई नीचे!"सामने आओ?" बोला मैं,तभी, एक आवाज़ सी उभरी, जैसे...
चालीस-पचास लोग? अब ये कौन हो सकते हैं? कहीं कोई जत्था ही तो नहीं देख लिया था उसने? रात का समय था, उसके मुताबिक़, और जत्था रात में तो नहीं जाने वाला, वो...
सिर्फ ख़ैरियत ही, और कुछ नहीं! कमाल है! ये जिन्न है भी कि नहीं? अगर है, तो बड़ा ही सब्र वाला है! और अगर नहीं, तो बड़ी ही सोची समझी चाल चली गई है किसी खिल...
"भाई साहब, आप बैठिए यहां!" कहा मैंने दर्शन लाल जी से,"ज...जी..!" बोले वो,"एक काम और कीजिये?" कहा मैंने,"जी?" बोले वो,"रचिता की मम्मी को भी बुला लीजिए ...
