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"क्या आप ही हिफाज़त किये जा रहे हैं?" पूछा मैंने,"हाँ" बोली वो,"ओह...क्या मैं पूछ सकता हूँ इसकी वजह?'' पूछा मैंने,"वजह हमें नहीं मालूम" बोली वो,"तो किस...
रचिता रुक गई वहां, मैंने कमरा बंद कर दिया फिर, उम्मीद थी, कि अब कोई टोका-टोकी नहीं होगी, वक़्त कम ही था, न जाने वो हाज़िर हो या नहीं! वो कौन है, कैसा है...
मित्रगण! वो सम्मुख ही प्रकट हुआ! पीछे देखा, मैंने भी देखा! हुजूम था उधर, प्रेतगण का! ये सभी प्रेत, बाबा के सिद्ध-प्रेत रहे होंगे! कुछ स्त्रियां, बालक-...
"समझा दूंगा रचिता!" कहा मैंने,"मुझे बताइए न?'' बोली वो,"बस, अब ज़्यादा नहीं!" कहा मैंने,"मुझे, बेचैनी है बहुत!" बोली वो,"समझ सकता हूँ!" कहा मैंने,"बता ...
"यही है न? हे महापिशाच! आप और परास्त! नहीं! ये तो असम्भव है!" कहा मैंने,"यही सत्य है!" बोला वो,"नहीं! भार ने दबाया आपको!" कहा मैंने,"नहीं! मैं परास्त ...
और इसके बाद हम, लम्बी तान ले सो गए थे! मुझे लगता था अब कि ये मामला मेरी पहुंच में है और इसे अब मैं सुलझा हु लूंगा! इतनी अस्स ले, मैं सो गया था! शहरयार...
तो हमने वो टुकड़ा अब रख लिया था अपने संग! और अब चलना था वापिस! हुलारा बंद हो चला था और वज्र-घंटाल भी घनघना, अब शांत हो चुका था! अब शेष था तो बस यही कि ...
मैंने एक बार नहीं, कई बार टकराई ऊँगली! पर लगता था कि वो अब जा चुका है, वैसे भी सुबह होने में अब कुछ ही देर रह गई थी! मैंने इल्म वापिस लिया, शुक्रिया अ...
"तैय्यार?" बोले वो,"हाँ!" कहा मैंने,"वो कैसे जी?" बोले वो,"गया हमारा पता!" कहा मैंने,"पता?" बोले वो,"हाँ!" कहा मैंने,"कैसा पता?'' बोले वो,"हमारी थाह!"...
मैं आहिस्ता से आगे बढ़ता चला! हैरत ये, कि उसमे कोई हरकत नहीं! कमाल की बात थी! एक जिन्न, एक आलिम से ख़ौफ़ न खाये, ये अलग बात लेकिन, ग़ौर ही न करें, ये सबसे...
"आओ, बैठो!" कहा मैंने,"हाँ" बोले वो,और वे भी बैठ गए!"एक बात कहूँ?" बोले वो,"आपको भी पूछने की आवश्यकता?'' पूछा मैंने,"नहीं, ऐसा नहीं! फिर भी!" बोले वो,...
सच में मैं, बड़ा ही हैरान! मैंने ऐसा जिन्न न देखा था! न देखा था और न सुना ही था! कमाल इस बात का, कि वो इज़हार भी नहीं कर रहा था! न खुद सामने ही आ रहा था...
पानी पिया मैंने! सच में, पानी बड़ा ही अच्छा लगा! स्वाद वाला! शायद, गला ख़ुश्क़ हो गया था इसीलिए! कभी-कभार आम सी चीज़ें बेहद ही लज़ीज़ हो उठती हैं! तो पानी इ...
जिन्न की जब जब आमद हुआ करती है किसी जगह पर, जैसे कि ये घर, उधर, अक्सर, रात के वक़्त, तो आवाज़ हुआ करती है, एक कीलन के पश्चात! इसे वो जिन्न पकड़ नहीं सकता...
हम चलते रहे मार्ग पर, करीब एक घंटा होने को आया और तब, दो रास्ते फ़टे, एक बाएं के लिए, एक दायें के लिए! अब था कोई नहीं वहां, जिस से पूछ सकें! अब? अब क्य...
