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बातें होती रहीं हमारी! बारिश ऐसी थी कि रुकने का तो नाम ही न ले! कभी तेज और कभी धीरे! लेकिन साथ ही न छोड़े! पहाड़ी क्षेत्र था, नदी-नाले सब उफान खा गए हों...
वहाँ से तो कुछ हाथ न लगा, एक तो लड़का घबराया हुआ बहुत था, उस से बोले न बन रहा था, और दूसरा ये की वो शरमा भी रहा था, बता भी नहीं पा रहा था, मैंने उसको ए...
और उसके बाद फिर आराम किया!चार बजे करीब आये थे अहमद साहब, उनसे मिले हम, वो हमें ले जाने आये थे उस लड़के से मिलाने के लिए, जो बीमार हो गया था, उस पिच्छल-...
घंटा डेढ़ घंटा बीत चुका था! बारिश मन ज़रूर हुई थी लेकिन बंद नहीं! और अब कोई आसार भी नहीं थे बंद होने के! भीगना था और जाना था वापिस! कोई तरीका था नहीं! ...
बारिश पड़ती रही जी कोई साढ़े ग्यारह बजे तक! उसके बाद, बाहर से, बत्तखों की आवाज़ें आने लगीं! लगा जैसे कि सामने अहाते में ही घूम रही हों वो! और हों भी बहुत...
चाय पी जी हमने, साथ में लाया हुआ वो पिस्ता-मेवा भी खाया! अखरोट बेहद शानदार था, उसकी मींग बेहद बड़ी और मुलायम थी! अखरोट का तेल, किसी भी कैंसर को खत्म कर...
"संशय ही तो उर्वरक है! उर्वरक, विश्वास-पादप के लिए!" बोली वो!इतने सटीक शब्द! इतना सधा हा उच्चारण! कौन कहता है कि भाषा मात्र एक समूह हेतु ही निहित रहा ...
साँझ घिर आई! और हवा में शीतलता आ बैठी! कपड़ों में, वो शीतलता, आ घुसी! गाड़ी के शीशे बंद करने पड़ गए! अब तो सामने की विंड-स्क्रीन पर भी, वाईपर चलाना पड़ रह...
"नहीं मुरी! नहीं!" कहा मैंने,"क्या नहीं?" बोली वो!"नहीं, मुझे अभी भी कुछ समझ नहीं आ रहा!" कहा मैंने,"क्या नहीं समझ आ रहा?" पूछा उसने,"बाबा समंद यहां आ...
तो चाय पी हमने, साथ में वो मिठाई भी खायी, और फिर से चल पड़े, एक बात, पानी बहुत बढ़िया था वहाँ का, शायद वादियों का और पहाड़ों का पानी था, यही वजह थी उसकी!...
इशारा किया उस औरत को मुरी ने, और वो औरत आ गयी हमारे पास, एक एक अंदर एक गिलास उड़ेसे, पकड़ाए मुरी को, मुरी ने एक गिलास निकाला और मुझे पकड़ाया, और दूसरा खु...
पल हर के लिए मैं ही खुद जैसे पाखरा के उस जोगरा-मंदिर में भटकने लगा था! मैंने जितना सोचा था, ये तो उस से भी अधिक रहस्यपूर्ण था! कुछ न कुछ तो घटा ही था ...
वो ले आया था पानी! हमने थोड़ी और चढ़ाई, हो गए पूरे टुल्ल, न पता चला, कब लेटे और कब सो गए! रात में बाहर ठंडक थी, नींद बढ़िया आती है ऐसी ठंडक में! तो पता ह...
"तो आपने स्वयं देखा था उसे?" कहा मैंने,"हाँ जी!" बोले वो,"कुछ और जो बताने लायक हो?" पूछा मैंने,"और जी..." अपनी दाढ़ी में हाथ फेरते हुए बोले वो,"कुछ ऐसा...
"किसने बताया तुम्हें?" पूछा उसने,"बताया तो आपको, किसी ने नहीं!" बोला मैं,"नहीं, ऐसा हो ही नहीं सकता!" बोली वो,"क्यों?" पूछा मैंने,"रमुआ, समरु, संतोष, ...
