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"ये द्वितीय प्रहर था?" पूछा मैंने,"नहीं, चतुर्थ!" बोले वो,"ओह...चतुर्थ प्रहर चुना था उसने!" कहा मैंने,"हाँ, भोर से पहले का!" बोले वो,''समझ गया!" कहा म...
हम दायें भागे, और एक झटके से रुके! अब नीचे की तरफ कोई रास्ता नहीं था! ऊंची ऊंची घास, पौधे और पत्थर, और कुछ नहीं!"यहां तो रास्ता ही नहीं?" बोले शर्मा ज...
"आकाश में तारे खिले हुए थे, अँधेरा, यूँ कहो कि अँधेरा था नहीं! हाथ को हाथ, सुझाई देता था! बड़ा ही पावन सा माहौल था वो, उस समय का! समस्त जंगल, जैसे जीवि...
मैं और शर्मा जी, घास पर चल रहे थे, कुछ दीख नहीं रहा था सामने, अँधेरा बहुत था, पानी पर पड़ती कुछ कुछ चांदनी जब परावर्तित होती, तो रेत को भी संग में चमका...
मैं और शर्मा जी, आगे बढ़ चले, तभी एक चीख गूंजी! चारों तरफ गूँज पड़ी! और उसके बाद, कोई आवाज़ नहीं हुई! हमने एक घंटा इंतज़ार किया, कोई आवाज़ नहीं! अब रात में...
वो निशान, वहां तक आकर गायब हो गए थे, इसका मतलब, वो यहां आई थी, निशान फिर से जाँचे गए, और उनकी साफ़ छाप देखकर, पता चला, कि ये ताज़ा ही हैं, चूंकि पिछली र...
"नहीं? अरे तो फिर प्रतीक्षा किसकी?" पूछा मैंने,कुछ न बोलें वो! कुछ भी न! बाहर देखें, जैसे मेरा कहा उन्हें सुनाई न दे! ऐसे दरकिनार करें! और यहां मुझे प...
तो हम उस तालाब के पास आ गए थे! पानी झिलमिला रहा था उसका! रुई जैसे बादलों का रूप छलक रहा था उसमे, जब हवा चलती, तो पानी की जैसे वो इठलाती कन्या, अपने बद...
न करे मन वो तस्वीर देने का! बिलकुल न करे! लेकिन...विवशता! देनी तो थी ही! अब चाहे जी रोये या मैं! देनी तो थी ही! सो, दे दी, कांपते हुए हाथों से, हाँ, द...
तो हम, तिब्ब-दवाइयाँ देखते हुए, बातें करते हुए, आगे बढ़ते रहे! शम्सू ने एक अहम बात बताई! हालांकि, शम्सू ने उसे देखा तो नहीं था, लेकिन एक नयी जानकारी दी...
कुछ ही समय में बाबा संतोष वापिस लौटे! हाथों में एक बड़ा सा बैग लिए! बैग कम और पोटला ज़्यादा! लाल रंग के कपड़े में बंधा था ये पोटला! ढप्प से रखा वो उधर! व...
हम उसी तीसरी जगह पर आ पहुंचे! ये जगह बेहद शानदार थी! मैंने तो ऐसी जगह या तो चित्रण में, या सीनरी में ही देखी थी! वहीँ एक झोंपड़ा डाल लिया जाए तो कैसा आ...
खाना खा लिया था, मठा पी लिया था, डकार ऐसी आयीं जैसे पता नहीं घर से ही भूखे चले थे! उसके बाद आराम किया, देह खुलने लगी थी मठा पी कर! आराम किया तो आँखें ...
"और क्या बताया मुरी ने?" पूछा बाबा समरु ने तब,"आप सब जानते हैं!" कहा मैंने,"नहीं, बताओ मुझे!" आदेश सा दिया उन्होंने!"यही कि आगे की कहानी मैं आपसे जानू...
तो हम लौट आये थे वापिस! घर आये तो आराम किया, दूध इतना पी लिया था कि आँखें भारी हो गयी थीं! इसीलिए थोड़ा आराम किया, दूध अपने आप में ही एक पूर्णाहार है! ...
