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इस दृष्टांत का अर्थ था कि व्यक्ति को अपने पाप-कर्मों का फल भुगतना ही होता है! कोई भी, किसी के पाप नहीं वहन कर सकता! न ही ये स्थानांतरित किये जा सकते ह...
अब हम वहां से तीर हुए! निशाना सामने था हमारा! कभी दौड़ते-भागते! कभी रुक जाते! कभी सुस्ताते! कभी रुक जाते और फिर से दौड़ते! मेरी आशंका की बारिश, मेरी नैय...
हाँ! बात सच ही थी, अब इसका क़िस्सा खतम करने का समय आन पहुंचा था! इस गाँव के लिए, और दूसरे गाँवों के लिए इसका जीना, या यहां रहना, हमेशा के लिए ही खतरनाक...
वो आवाज़ें तो दे रही थी, लेकिन नज़र नहीं आ रही थी! मैं बार बार टोर्च ऊपर-नीचे करता था, लेकिन वहां पेड़-पौधों के सिवाए और कुछ भी नहीं था! उस रोज हवा तेज थ...
"बाबा?" पूछा मैंने,"हाँ?" बोले वो,"मुहाना कहाँ है?" पूछा मैंने,"मुहाना?" बोले वो,"हाँ, प्रवेश-द्वार?" कहा मैंने,"उधर, उधर है!" बोले वो,"दिखाओ?" कहा मै...
उस समय रात के डेढ़ बज रहे होंगे, दुनिया अपनी दुनिया में मग्न थी और हम यहां इस जगह, वीराने में मग्न थे!"निज़ा?" बोली वो,मैं झुका नीचे, और देखा उसको,वो हा...
सामने देखा! एक स्थान सा! अधिक बड़ा नहीं! छोटा सा ही! वहाँ, जास्मीन ही जास्मीन! पौधे लगे थे! आज हवा का रुख हमारी ओर रहा होगा, इसीलिए सुगंध ही सुगंध! ये ...
वो पेड़ पर चढ़ी थी! बड़ी ही ख़ौफ़नाक लग रही थी! पेड़ को कस के जकड़ा था उसने! आँखें दूधिया सफेद! बाल नीचे लटक रहे थे! अगर उसके स्तन न होते, तो वो किसी वेताल स...
तेईस बरस बाद भी, यादें ताज़ा थीं उनकी! जैसे, उनके लिए, कल की ही बात हो! ऐसे ही बाबा समरु, वृद्ध की आँखों में, भले ही उम्र की थकान थी, परन्तु अभी भी, वो...
मैं सम्भल के खड़ा हो गया था! लेकिन नज़र, उसी पर बनाये हुए थे! ये को भी शय थी, अपने आप में एक अलग ही शय थी! ऐसी शय, मैंने कभी न देखी थी! न उसे कोई भय था,...
"कितना हास्यास्पद है न! कितना ही अजीब!" कहा मैंने,"वो क्या?" पूछा उन्होंने,"कि हम, हम पढ़े-लिखे मानव! पढ़े-लिखे, धन-धान्य से सम्पन्न मनुष्य, ये भी नहीं ...
एक बात तो तय थी! वो डर नहीं रही थी! उसको डर था ही नहीं! शायद, वो आदी थी इंसानों की! हाँ, वो डरा रही थी, ये भी मैं नहीं कह सकता, हो सकता है, ये उसकी अं...
मैं और शर्मा जी, उसको एकटक खड़े देखते रहे! वो अब बिलकुल भी नहीं हिल रही थी! हाँ, उसके केश हिल रहे थे! वो अभी भी हमारी टोर्च की रौशनी की जद में थी, इसील...
"और यही सबकुछ किया उस तापसी ने! अपने ध्यान से, उसने शीर्षावस्था प्राप्त कर ली!" कहा मैंने,"ये तो सत्य है!" बोले वो,"मैंने देखा नहीं तापसी को कभी, परन्...
बड़ा ही अजीब सा मामला था! इसका मतलब इस शय का साबका इंसान से पड़ता ही रहता था, और ये, इंसानी फ़ितरत से पूरी तरह वाक़िफ़ थी! हम इंसान तो थे, लेकिन कुछ पढ़े-लि...
