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वे चले गए थे, पता नहीं कहाँ से आते थे और कहाँ को चले जाते थे! हमने तलाश की, तो कुछ नहीं दिखा था, कोई खंडहर होता, कोई चौकी सी ही, कोई इमारत आदि, तो भी ...
तो हम वापिस आ गए, कुछ हाथ लगा नहीं, सोचा था कि कुछ दिख ही जाए, सो नहीं मिला, अब वैसे भी उस दुखदायी घटना को घटे दस बरसों का समय हो गया था, अब क्या निशा...
वो पत्थर कहाँ से आया? किसी ने फेंका क्या? अगर हाँ, तो किसने? क्यों? मैंने आसपास देखा, पास में ही, चट्टानें थीं, कुछ छोटी छोटी पहाड़ियां भी, शायद वहीँ स...
"मुझ से रहा नहीं गया! मैं उतर गया गाड़ी से, और सीधा ही जा पहुंचा उनके पास!" बोले वो,"अच्छा?'' मैंने हैरानी से पूछा,"हाँ जी!" बोले वो,"फिर?" पूछा मैंने,...
हम चल दिए दीप साहब के आवास के लिए, बाहर जैसे धुंध का सा माहौल हुआ, हुआ था, ये ओंस थी, सुबह सुबह ऐसा ही माहौल होता है अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में! हम चल ...
"अजी क्या देख लोगे?'' बोले वो,"अमा जो दिखाओगे!" बोले वो,"हैं? क्या देखोगे?'' बोले वो,"देखते हैं, ज़ोर कितना बाजू-ए-क़ातिल में है!" बोले वो!हम हंस हंस के...
"और बाबा समंद! बाबा समंद तो जैसे अपना सर्वस्व उस तापसी को सुपुर्द कर चुके थे! उन्होंने अपना तपोबल, योगबल एवं ध्यानबल, सब जस का तस, उस तापसी को सौंप दि...
और इस तरह हम बातें करते करते, सवाल जवाब करते करते आ गए समीप उस स्थान के! मुरी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर आई! मैं इस मुस्कान को बयान नहीं कर स...
हम भी लपके तभी के तभी बाहर जाने को! मुरी बाहर ही खड़ी हुई थी, हमारा ही इंतज़ार कर रही थी! हमने झट से अपने जूते पहने और हो लिए संग उसके! मुरी के चलने की ...
कहानी में नया मोड़! नया मोड़ और फिर एक नया जोड़! अब ये जोगरा भी असली नकली! पता नहीं अभी क्या क्या असली था और क्या क्या नकली! खैर, हाज़िर-मंत्र का जाप करना...
वो आ गयी कुछ ही देर में! चाय ले आई थी, चाय बनाने ही गयी थी! दी हमें, स्टील के गिलास में गरम गरम चाय! मैंने चुस्की ली, और उस चुस्की के साथ ही, बरी कर द...
मैंने एक फैंसला ले लिया था अब! उसने इशारा किया था एक जगह के लिए! इस से शायद, निज़ा का कुछ खुलासा हो जाए, इसीलिए लिया था मैंने ये फैंसला! मैं आगे आगे चल...
तो हम, पहुँच गए उधर! अब चले अंदर की तरफ! महिलायें, दो चार जो वहां थीं, एक साथ गुट बना कर खड़ी हो गयीं! कोई पुरुष था नहीं वहां! मै आगे गया, उन महिलाओं क...
