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"कब से?'' पूछा उन्होंने,"साल भर हो गया होगा?'' बोला वो,''और कहाँ?" पूछा उन्होंने,"वो हवेली नहीं है?'' बोला वो,"अच्छा? पुरानी वाली?" बोले वो,"हाँ, वही!...
"अब कड़ाही चढ़ानी ही थी, तो जी, खरीद के ले आये! ये रहा शिकार हमारा!" बोले अज़ीज़ साहब!"बढ़िया किया!" कहा मैंने,"है जाओ यार! सांप से डर गए!" बोले शर्मा जी,"...
शाम हुई, सोया-चांप मंगवा ली थीं, साथ में फौजी लाल पानी! दमदार चीज़ थी! गरमी आ गयी थी! खूब हंसी-मज़ाक हुआ! खाना-पीना निबटाया और फिर सो ही गए! रात भर बारि...
मैं बार बार, उन्हीं चट्टानों पर, रौशनी मारता था! कि कहीं कुछ नज़र ही आ जाए, नज़र तो नहीं आ रहा था, हाँ, आवाज़ें ज़रूर आ रही थीं उस डिंपल की! मैं रुक गया ए...
"हाँ जी, बड़े बाबू! मंगवाऊँ गरमा-गरम समोसे?'' बोले कपूर साहब!"अरे! हम तो रोटी खाने वाले आदमी हैं यार!" बोले शर्मा जी,"लो! तो बोलो! मंगवाऊँ फुलैरा-रोटी?...
बड़ी अजीब सी स्थिति थी उस वक़्त, अब पांचवां किरदार भी आ गया था, ये अखिलेश, कथित रूप से, मामा, इस डिंपल का, इसका मतलब कि वो भी साथ ही होगा इनके, लेकिन अग...
अब पच्चीस आने में छह दिन बाकी थे! आज उन्नीस थी! तो जी किसी तरह हम अपने अपने घर पहुंचे! और फिर उसके बाद, दो तीन बाद, फिर से मिले, पच्चीस तारीख को निकलन...
"डिंपल? रुको?" कहा मैंने,डिंपल को न जाने क्या हुआ था? आज तो अजीब सा ही व्यवहार था उसका, आज वो ऐसा जतला रही थी, कि जैसे वो न जानती हो हमें! ऐसा क्यों ह...
तो थोड़ा सा और मजा उठाया हमने मदिरा का! और फिर, आराम से, लम्बी चादर तान, सो गए! अब यहां से डेढ़ बजे निकलना था, आज टोर्च के लिए ही कह दिया था मैंने, टोर्...
"हाँ, ये वजह हो सकती है!" बोले दीप साहब!"हो नहीं सकती, यही है!" कहा मैंने,और तब, मैंने शर्मा जी से वो दचक-क्रिया वापिस ली, अब वे फिर से सामान्य हो चले...
"दिखेगा! अभी दिखेगा!" कहा मैंने,तब, फिर एक और क्रिया की, मंत्र पढ़ा, और उनके दोनों कंधे, छाती, कमर और घुटने, पोषित कर दिए, फिर नेत्र बंद करवा कर, फूंक ...
"हाँ, समझा जा सकता है, कुछ न कुछ तो गड़बड़ है ही!" कहा मैंने,"गड़बड़ ही नहीं, कोई साजिश सी लगती है!" बोले दीप साहब,"हाँ, इंकार नहीं किया जा सकता!" बोले रज...
रजत साहब, करीब एक घंटा और रुके, उन्होंने काफी सूझ-बूझ से बातें कीं, दरअसल उनके रिश्तेदार कचहरी में थे, एक अधिवक्ता हैं वो, तो वही ये काम कर रहे थे, अध...
हम लौट तो आये, लेकिन मन नहीं माना मेरा तो, लगा, हम यहां, कंबल में लेटे हैं आराम से, और वो बच्ची, बेचारी, अकेली, भीगी सी कोहरे में, उस जंगल में, सड़क कि...
"अंकल, इन्हें जगाइए, मैं थक गयी हूँ!" बोली वो, पाँव पटकते हुए!कैसा जगाऊँ? काश कि जगा पाता! किसी बच्ची के सामने, शब्द ही न फूटें, ऐसा तो पहली बार हुआ थ...
