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मैं उस पुरानी पुलिया पर, हाथ टिकाये हुए खड़ा था, पुलिया की दीवारें तो गीली ही थीं, जैसे ही हतः हटाया, मेरे हाथ पर किसी ने गीला हाथ रखा अपना,और झट से हट...
"अच्छा था! हाँ, होगा अच्छा! लेकिन तुम कौन हो?" पूछा मैंने,"अच्छा........अच्छा था तजिंदर..." आई फिर से आवाज़,और कोई मेरा कॉलर छोड़, जा छिटका पीछे!"सुनो? ...
"राजेश जी! बहुत भटक लिए! बहुत!" कहा मैंने,"मैं नहीं समझा पा रहा हूँ, कुछ भी?" बोला वो, परेशान सा हो कर,उसी परेशानी देख कर, दोस्तों, सच कहता हूँ, अच्छे...
आवाज़ रुकी और हम पलटे! अब हम चौकस थे! पल भर में ही न जाने क्या हो! कब कोई हमला ही कर दे! उस जगह पर जहां पानी पड़ा था, पानी में छप-छप सी हुई! कुछ पलों तक...
तो उन्होंने ने बात कर ली थी, बालक भी था वहां और एक औरत, पेट से भी थी, इसका मतलब, वहां काम नहीं हो सकता था! अब यहां ऐसी कौन सी जगह ढूंढी जाये जहां से क...
"ये साले, चीथड़े-गुदड़ी कहाँ से आ गयीं?" बोले वो,"कहीं किसी ने फेंकी तो नहीं? मतलब कोई अलाव आदि तो नहीं?" पूछा मैंने,"इस बीहड़ में, जंगल में, भला कौन जला...
वहां कुछ नहीं था! इस बार भी लगता था कि जैसे कोई जानवर ही रहा होगा! वो तेजी से भाग कर, सड़क पार गया होगा! भय से भूत बन जाता हे और कई बार झाड़ियाँ, पेड़, प...
अब हम सड़क तक आ गये थे, हमारी गाड़ी की पार्किंग-लाइट नज़र आने लगी थी, वे दोनों ही, बेसब्री से हमारा ही इंतज़ार कर रहे होंगे, ये तो मैं जानता था, इसीलिए, ह...
"क्या कहीं?" पूछा मैंने,"कोई इन पत्थरों के पीछे तो नहीं था?" बोले वो,"अरे हाँ, आओ, देखें!" कहा मैंने,तो हम, उन पत्थरों से रास्ता बनाते हुए चले ज़रा पीछ...
"हाँ? क्यों नहीं आये? वहीँ तो जाना है?" बोला अखिलेश,मैं मुस्कुराया! हालांकि, मुझे मुस्कुराना नहीं चाहिए थे, लेकिन मैं मुस्कुरा पड़ा, शायद ये मुस्कुराहट...
अभी हम पीछे देख ही रहे थे, कि गाड़ी के दोनों तरफ के दरवाज़े खुले और वे सभी दौड़ के हमारे पास चले आये! हम भी चौंके!"क्या हुआ?'' पूछा मैंने,"वो, वहाँ!" बोल...
गाड़ी का बज़र दो बार बजा था, निश्चित ही था कि कोई न कोई टकराया तो था ही उस से! जानवर होता, तो एक बार टकरा कर, दुबारा नहीं टकराता! शायद डर जाता! या हो भी...
बिंदर साहब ने अभी रौशनियों की बात कही थी! ऐसा अक्सर सुनने में भी आता है, कि अमुक जगह पर रोशनियाँ देखी गयीं! देखी जाती हैं! आदि आदि! रौशनियों की दरअसल ...
उसे जैसे समझ में नहीं आ रहा था, कि मैंने पूछा क्या है उस से! न उसने अपनी सोच पर ही ज़ोर डाला, जैसे हम डाला करते हैं! बस, हमें ही देखता जा रहा था! जैसे,...
"ये सात के आसपास की बात है?'' पूछा मैंने,"हाँ जी!" बोला वो,"सड़क सुनसान ही रहती है क्या?" पूछा मैंने,''अक्सर!" बोला वो,"मतलब यहां, इस ओर आने वाले या यह...
