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"हाँ! बाबा ने मंशा जता दी थी अपनी!" मैंने कहा, "अफ़सोस" शर्मा जी ने कहा! "नाथू ने कुछ नहीं कहा उस समय, लेकिन वो भी अवाक था, ये कैसी दक्षिणा? रश्मि...
रश्मि की बीच भक्ति-भाव का ही रिश्ता लगता था! ऐसा चलता रहा शर्मा जी! नाथू के घर में कलेश बढ़ गया, उसके भाई, उनके औलादें और पिता जी, सबसे मनमुटाव हो गया...
"हाँ, अब समझे आप!" मैंने कहा, "तो नाथू ने महसूस नहीं किया?" उन्होंने पूछा, "कैसे महसूस करता बेचारा नरसिंह! वो तो बाबा की भक्ति में आकंठ डूबा था! उ...
"हाँ! हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती शर्मा जी!" मैंने कहा, सोच में पड़ गए वो! बाबा की तो छवि उन्होंने अपने मन में बनाई थी उसमे तरेड़ पड़ने लगीं! जैसे ...
"जब अगले दिन अपनी पत्नी को लेकर पहंचा नरसिंह बाबा के पास तो बाबा ने उसकी पत्नी की जाँच की, कुछ सामान लिखवाया, नरसिंह ने लिख लिया, बाबा ने बताया कि चार...
जाएगा तेरी माँ का इलाज राजन, परेशान नहीं होना, जब तक मै ज़िन्दा हूँ किसी को कष्ट नहीं होने दूंगा!" उसी समय शर्मा जी का फ़ोन फिर बजा, उनके घर से ही फ...
"जानते हो, मेरी और उसकी बोलचाल क्यों नहीं है?" मैंने पूछा, "क्यों नहीं है?" उन्होंने पूछा, "इसलिए कि वो जिसके सरंक्षण में है वो मेरे मत का कट्टर श...
उस शाम ख़ुशी ख़ुशी घर पहुंचा नरसिंह! घर में सभी को ये खबर दी गयी! सभी प्रसन्न हुए! अब सुबह का था इंतज़ार! सुबह हुई, तो नहा धोकर नरसिंह भागा बाबा के पा...
"वो तेरा बेटा! उसे भी खो दिया तूने!" बाबा ने कहा, ये सुन नरसिंह के दिल में छेद होते चले गए, जैसे किसी ने कील ठोंक दी हो हथौड़े से, गहराई तक! बर्दाश्...
"क्या हुआ था उसे?" उन्होंने पूछा, "था तो कोई रोग ही, हाँ कोई तंत्र-मंत्र नहीं था उसको" मैंने बताया, "क्या हुआ फिर उसका?" उन्होंने पूछा, "एक बार ...
पत्नी को तपेदिक का रोग बता कर कन्नी काट ली, अब दुखी नरसिंह अपनी पत्नी को लाया दिल्ली, यहाँ उसका इलाज आरम्भ हुआ, कुछ लाभ दिखाई दिया आरम्भ में, नरसिंह...
"बताता हूँ" मैंने कहा और मै उठा और चौकड़ी मार अपनी सीट पर बैठ गया, ये आरक्षित डिब्बा था, कई लोग तो उतर चुके थे कानपुर में ही, और कुछ लोग अब तक सोये हु...
"मै तेरा क्या हाल करने वाला हूँ, ये मालूम कर अपने कारिंदे से! हाज़िर कर!" मैंने कहा, वो बैठा और अलख में अपना हाथ काट कर चाकू से रक्त के छींटे दिए! क...
