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"चल, निकल यहाँ से!" बोला और उसने मुझे वहाँ से निकल जाने के लिए ऊँगली दिखाई! अब मेरी और उसकी आँखें टकरायीं आपस में, मैंने भंजन-मंत्र जागृत कर ही रखा ...
बोतल निबटाई हमने और मैंने अब विद्याएँ जागृत करनी आरम्भ की! करीब पंद्रह मिनट में आवश्यक विद्याएँ जागृत कर ली! अब मै तैयार था उस दुष्ट तांत्रिक का मुक़ा...
"हाँ!" उसने कहा! अब मै खड़ा हुआ! भंजन मंत्र पढ़ते हुए थूक दिया उस पर! मंत्र ने अचूक प्रभाव किया, वो अपना पेट पकड़ कर बैठता गया नीचे! मुंह से एक शब्द...
रास्ते में एक खाली जगह रुकवा कर मै बाहर गया, एक खेत में और अपना कारिन्दा हाज़िर किया, उसके वासुदेव का पता काढने ले लिए भेज, वो दो मिनट में ही वापिस हा...
उन्होंने अपनी आँखें पोंछीं! और हमारी गाड़ी ने रफ़्तार पकड़ी! हम पहुंचे नवीन के घर! घर में जैसे खुशियों की दीवाली मनाई जा रही थी, नवीन के छोटे भाई और...
अब उसको काटो तो खून नहीं! बोलती बंद हो गयी उसकी! काठ मार गया उसे! अवाक! "पूरन ने योजना बढ़िया बनाई थी जैसा तुमने चाहा था, अफ़सोस! अभी उस लड़की की ...
"हापुड़ के पास एक गाँव है, वहाँ" उन्होंने बताया, "चलिए मेरे साथ" मैंने कहा, "कहाँ?" उन्होंने पूछा, "अशर्फी के पास" मैंने कहा, "चलिए" वे बोले, ...
अरुणा आ गयी थी वहां, टूटी सी, इस संसार से जैसे बेखबर हो! "आओ बैठो अरुणा! आज से तुम बिलकुल ठीक हो जाओगी!" मैंने कहा, उसने मुझे देखा, फिर हलकी से हं...
अब मेरी हंसी छूटी! "हाँ जी" मैंने कहा, "अच्छा गुरु जी, क्या कार्यक्रम है?" उन्होंने पूछा, "चलते हैं नौ बजे" मैंने कहा, "ठीक है" वे बोले, "ना...
मै क्रिया में बैठा! अलख उठायी और अलख भोग दिया! मुझे अरुणा का उच्चाटन भंग करना था शीघ्रातिशीघ्र, इसके लिए मैंने कच्छप-नख ( कछुए का पंजा) बनी एक माला को...
"किसी भी सभ्रांत इंसान का खून खौल उठेगा ये जानकर" मैंने कहा, "मेरे सामने जब आएगा ना, क्या हाल करूँगा उसका, आप देखना!" वे बोले, मुझे फिर से हंसी आ ...
"वो तांत्रिक एक आवरण में बैठा है, कौन है ये नहीं पता, आज क्रिया में बैठूँगा तो भेदूँगा उसका आवरण!" मैंने कहा, "और ये कमीन हरामजादी औरत उस लड़की अरुण...
फिर बजे दो, अब मै अलख उठा सकता था, मौसम साफ़ था, मै स्नान करने गया और उसके बाद सीधे क्रियास्थल में! वहाँ मैंने वो कागज़ खोला और वो बाल निकाले, अब मैंन...
"गुरु जी, आज देखेंगे उस अरुणा के बारे में?" उन्होंने पूछा, "हाँ, अगर बारिश न हुई तो दोपहर में ही देख लूँगा" मैंने कहा, "हम्म! वैसे लगता नहीं बारिश...
"हाँ जी, था, वर्ष भर पहले, अब नहीं है" उन्होंने बताया! अब मुझे एक आशा की किरण दिखाई दी! "तो प्रेम-सम्बन्ध का अंत हो गया, आपने मना किया? आपत्तिजनक ...
