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अंदर आ गयी वो और बैठ गयी!दत्तू से बतियाने लगी,रात का एक बज रहा था,अब बस सोना ही था,तो मैंने वहीँ अपना बिस्तर लगा लिया,अब पड़ी बारिश!घनघोर!तिरपाल से टकर...
मैं उस समय,उसी श्मशान में,बनी झोंपड़ी में, भूमि पर बैठ कर,अपने चार साथियों के साथ,मदिरा-पान कर रहा था!तभी ज़ोर की हवा चली!धूलम-धाल हो गया!मुंह में धूल घ...
रहेगा! खैर, वे शुक्रवार की संध्या को विदा ले चली गयीं अपने देश! महंत को खबर दे दी गयी, वहाँ से मनसुख को भी खबर मिल गयी! कौलव नाथ की खबर आई मेरे पास,...
और निश्चित तौर पर उस बुजुर्ग औघड़ को सारी कहानी बता दी थी धूमनाथ ने! उस औघड़ का नाम कीना बाबा था! मैंने भी प्रणाम किया उसको! और फिर कुछ ही देर में द...
और तब आया कौलव नाथ अन्दर! नमस्कार की उसने और बैठ गया, दूध लेकर आया था वो जग में, उसने तीन गिलासों में दूध डाला और एक एक गिलास हमे दे दिया, और फिर बिस्...
गयी! पर परवाह किसे! सत्य की जीत का मद ऐसा ही होता है! टीसता ज़ख्म भी हंसने लगता है ख़ुशी के कारण! हँसता हुआ, मुस्कुराता हुआ, त्रिशूल को थामे चलता चला ...
पेट के पास रखे थे! तसल्ली से टांगें खोल कर सोये हुए थे! उनको देखते ही इबु के नेत्र सुर्ख हुए अब! उन दोनों की औकात इबु के सामने ऐसी ही थी जैसे हाथी के ...
से शब्द बाहर ना आ सके! स्नायु-तंत्र को जैसे फालिज़ और देह को कुठाराघात मार गया हो! जीवन में पहली बार ज्वाल-मालिनी के दर्शन हए और वो भी संहारक रूप में!...
बताता हूँ तड़ित-रोड़का के विषय में, तड़ित-रोड़का सर्व-काल बली होती है, इस सहोदरी की भी कुल चौरासी सहोदरी होती हैं, जिनमे डाकिनी-शाकिनी आदि होती हैं! र...
किये हुए होती है! उद्देश्य की पूर्ति क्षणों में करती, शत्रु-भेदन उसके लिए ऐसा है जैसे कोई गजराज किसी पेड़ की डाल को बिना किसी प्रयास के तोड़ डालता है!...
उसने गुस्से में मेरी ओर अपना त्रिशूल ही फेंक मारा! त्रिशूल कुछ दूर जाकर भूमि में गड़ गया और ये देख मेरे होंठों पर मुस्कान आ गयी! जब बुमरा बाबा ने अप...
गया! उसका उद्देश्य पूर्ण हुआ था और अब वहाँ ठहरने का कोई औचित्य नहीं था! तभी शमशान में लगा एक बड़ा से पेड़ का एक बड़ा सा तना नीचे झुका और भूमि पर गिर ग...
पसलियों में अकड़न महसूस हुई! ये दूसरा चिन्ह है! और तीव्र मंत्रोचार और फिर मेरे उदर में शूल उठा, कुछ क्षण के लिए! लगा कि जैसे के आने वाली हो, ये तीसरा ...
औघड़ था, समझदार था, जब वान्यादल वहाँ प्रकट हुआ तो उसने उनकी काट करते हुए चौबीस बार मंत्रोच्चार करते हुए अपने त्रिशूल को भूमि पर मारकर उनको लोप कर दिया...
