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मेह बरसने लगा,आसपास,कुछ और लोग भी थे,हमने एक खोमचे के अंदर शरण ले ली,खूब बरसात हुई,करीब एक घंटा,और जब मौसम खुला,तो सभी अपनी अपनी राह चल दिए,मैं वहीँ ख...
मकान-मालिक के पास चिट्ठी आई थी,तब मुझे बताया था उन्होंने,माँ से मुझे बहुत प्यार था,सभी को होता है,कल तक का इंतज़ार नहीं हुआ,तनख्वाह, उसी दिन मिली थी,मै...
मेरी मासिक तनख्वाह तीन सौ चालीस रुपये थी!लेकिन मैं इसमें भी खुश था!सस्ता ज़माना था,कहीं कोई कमी थी नहीं,गाँव में ज़मीनें थीं,खेत थे,मवेशी थे,एक बड़ी बहन ...
कुछ ऐसे ही भाव थे उनके चेहरे पर,तभी शर्मा जी ने,एक सिगरेट सुलगाई,दो कश खींचे,और मुझे दे दी,मैंने भी सिगरेट पर तरस खाया,और होंठों से लगा ली,दो कश खींचे...
और चींटे भी!तेज तेज भाग रहे थे!सूरज अब,बस अस्तांचल में जाने ही वाले थे! महेंद्र जी सोचते रहे!और हम इंतज़ार करते रहे!उन्होंने,नीचे से एक ढेला उठाया,मि...
कोई इतिहास होगा इसका,कोई बेहद,सनसनीखेज इतिहास!ऐसा इतिहास,पूरे भारत में,बिखरा पड़ा है!"कैसी कहानी?" मैंने पूछा,"आइये" वे बोले,अब हम चले उनके साथ,पुल पार...
यहां मेंहुआ मेंढक आदि पकड़ने आया था!उसकी लाल लाल आँखें,दहक रही थीं!खैर,हमारा रास्ता छोड़,झाड़ी में सरक गया!हमने पोखर पार किया,और मुझे तभी सामने,एक पतले स...
यही है जीवन!किसी के प्राण गए,किसी को जीवन मिला!हम और आगे चले,यहां जामुन के पेड़ लगे थे,कुछ अब ठूंठ थे,कुछ पर,अभी भी वानर-समुदाय,अपना हक़ जमाये बैठा था!ह...
घीये भी थे वहाँ!हम आगे चल रहे थे,शाम का खुशनुमा माहौल था!सामने ही,कुछ दूर पर,एक बड़ी सी नहर बह रही थी!नहर पुरानी थी,क्योंकि,उसके पल छोटे थे,और बीच बीच ...
तरह अपने आपको बचाया उस बालक ने, और सुबह जब लोग पानी भरने आये, तो निकाला उन्हें, वे भाग लिए घर से, उस समय वो, लखनऊ से कोई डेढ़ सौ किलोमीटर दूर के एक गाँ...
शर्मा जी को देखा,श्री श्री श्री जो को देखा,बिन्दो को देखा,और फिर बाबा जागड़ को देखा!सभी खुश थे!हो गए थे खुश!मुझे सकुशल देख कर!जागड़ उठा,मेरी तरफ हाथ किय...
कुछ न हुआ,श्री श्री श्री जी ने,सभी उपचार किये,किन्तु कुछ न हुआ,मैं किसी विद्या का शिकार हुआ था!बाबा जागड़ की किसी अमोघ विद्या का!सभी घबरा गए थे!श्री श्...
त्रिशूल,अपनी मूठ को भूमि में धँसाता हुआ,करीब दो फ़ीट उतर गया नीचे!एक किरण सी उठी!और मेरे माथे से टकराई!बस!मैं ढेर हो गया!नीचे गिर गया!नेत्र बंद हो गए!औ...
"बताता हूँ!" उसने कहा,और तभी!भयानक वायु चली!असंख्य उलूक आ बैठे वहाँ!असंख्य सर्प,भूमि पर प्रकट हो गए!सब मुझे ही देखें!जैसे मुझे, शिकार समझा हो!मैंने अप...
