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"क्यों? क्या हुआ है उसे?" मैंने पूछा,"पता नहीं जी, लेटा ही रहता है" वो बोला,"ओह" मैंने कहा,"मर्ज़ क्या है उसे?" मैंने पूछा,"कहते हैं फ़ालिज पड़ी है" वो ब...
नींद तो अब खुल ही चुकी थी,तो अब, सिगरेट निकाल ली मैंने,और सुलगा ली,और पीने लगा,"सोहन?" मैंने कहा,"जी बाबू जी?" बोला सोहन,"ये ठाकुर बलवंत सिंह कैसे आदम...
उस औरत को देने!"कहाँ से आ रहे हो बाबू जी?" एक ने पूछा,"शहर से, दिल्ली से" मैंने कहा,चाय का घूँट भरते हुए,"अवेर हो गयी बहुत?" बोला वो,अब सोहन ने,सारी ब...
कुछ पुआल भी रखे थे,दो तीन बिटोरे भी पड़े थे,एक लालटेन टंगी थी उसमे,प्रकाश नाम मात्र को ही था,ऐसे टंगी थी,कि जैसे किसी को,दिखाने के लिए ही,टांगी गयी हो ...
तो लगता था कि जैसे,बैलगाड़ी,बैलगाड़ी न हो कर,पालना बन गया हो!इस कारण से,और नींद आने लगी थी,पीछे वो औरत बैठी थी,नहीं तो,वहीँ सो जाता मैं, लम्बा हो कर!तो,...
और कई सारी,मटर की फलियां,दे दीं मुझे,मैं छीलता उन्हें,और एक एक दान,चबाता जाता!मीठे थे वो सभी मटर! अभी बहुत रास्ता तय करना था,और घड़ी में,बड़ा काँटा,जू...
हम आगे चलते बने!और कोई एक किलोमीटर दूर जाकर,बैलगाड़ी रोक दी उसने,उतरा,और सड़क किनारे,चिल्लाने लगा,"रे, बुद्धन यही क्या?" एक बार!फिर दो बार!फिर तीन बार!"...
मैं उतर गया,एक कुआँ था,पुराना सा,मैंने कभी नहीं देखा था,खजूरों के पेड़ों से होते हुए,सोहन ले गया वहां,बाल्टी डाली,और रस्सी से पानी खींचा,पानी आया,ताज़ा ...
"जेब कट गयी?" सोहन ने बैलगाड़ी रोकी,"हाँ, गाड़ी में, दिल्ली वाली गाडी में" मैंने कहा,"ओ! ये बहुत बुरा हुआ बाबू जी" बोला सोहन,"अब क्या करें! कट गयी तो कट...
उसी का सामान लाया है वो,और ये जो औरत है,इसका नाम फूला है,ये उसकी पत्नी है,दोनों ही,अपने ठाकुर बलवंत सिंह के,नौकर हैं,लेकिन कभी भी,ठाकुर बलवंत सिंह ने,...
और 'राम राम' कही,मैंने भी कही,बैलगाड़ी में,एक महिला बैठी थी,साथ में दो बोरी अनाज की पड़ी थीं,कुछ भेलियाँ,गुड की रखी थीं,कुछ एक आद पीपे रखे थे,लगता था,कि...
तो कभी कभार नज़र पर ही जाया करती थी,उसका रेत,किनारों का रेत,चाँद की रौशनी में,चमचमा रहा था,जैसे हीरे जड़ दिए गए हों वहाँ,आसपास, सरकंडे लगे थे,कुछ कुश की...
और फिर,मुझे वहाँ उतार दिया गया,जहां से उनका रास्ता अलग होता था,मैंने पैसे की पूछी तो मना कर दिया उन्होंने!वे आगे बढ़ गए,और मैं भी आगे बढ़ गया! मैं आगे...
लेकिन, अपने छात्र जीवन में,कई बार,साइकिल पर मैंने,'वो रास्ता काटा था,कभी कभार,पैदल भी!आज फिर सही!तो मैं पैदल पैदल चल पड़ा!रास्ता में,सड़क किनारे,बने खोम...
मैं चल दिया आगे आगे,और तभी मैंने अपने पर्स पर हाथ रखा,जो कि,मेरी पैंट की पिछली जेब में था,हाथ रखा,तो पर्स नहीं था!मैं घबरा गया!कहीं, वहीँ,उसी, खोमचे म...
