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बटुआ था!हाँ!वही था!बिलकुल वही!मेरा ही बटुआ था वो!उस पर,सनराइज लिखा था!जैसा,मेरे बटुए पर लिखा था!धड़कते दिल से,कांपते हाथों से,मैंने वो बटुआ उठाया,खोला,...
बड़े बड़े,और धतूरे भी लगे थे,मैंने चारों ओर देखा,आगे चला,और अचानक!...................... अचानक!अचानक से मेरी नज़र,सामने पड़ी,दीवार पर बने एक आले पर,आला,...
वही उसका लोक-गीत,आल्हा-ऊदल का वो गीत,यही घूमता रहा दिमाग में!मैं करीब पांच घंटे सोया,उसके बाद,खड़ा हुआ,वस्त्र पहने,और,गाँव से बाहर जाने लगा,तभी,चाचा जी...
स्नेह,जो अभी उपजा था!"दुबारा, कभी नहीं मिलेंगे वो! मुझे भी नहीं मिले महेंद्र बेटा!" वे बोले,कांच सा टूटा,टूट कर बिखर गया,बिखरा,तो किरिच,मुझे चुभ गयीं!...
कितने प्रेम से,आदर से,मेरा सत्कार कर रहे थे वे सब!चाय पिलाई,होले खिलाये,फूट-सेंध,और तो और,वो टूटा रास्ता,वहाँ भी,मिट्टी नहीं डालने दी उसने!दिमाग भनभना...
अब यक़ीन आया!हाँ,वो कुआँ!वो मीठा पानी!सब याद आ गया!"आपने चाचा जी, जांच नहीं की?" मैंने पूछा,"की, और जो पता चला, वो बता दिया है मैंने" वो बोले,"लेकिन आप...
झूठ नहीं था!मैंने फूट-सेंध खायी थी!तभी मेरी नज़र,अपने हाथ पर पड़ी,मेरे हाथ,अभी तक काले थे!उन होलों के कारण,मैं छील छील के खा रहा था,उन्ही की,कालिख थी ये...
उनका वो बेटा!वो फौजी बेटा!"लेकिन उनका एक बेटा है, फ़ौज में?" मैंने कहा,"होगा, लेकिन वो कभी नहीं लौटा था, शायद किसी जंग में खेत रहा!" वे बोले,अब दिमाग फ...
घुड़सवार, फिर वो सत्तन!" वे बोले,मैं हैरान!चाचा जी को कैसे पता?ये तो,ऐसे बोल रहे हैं कि,जैसे मेरे साथ ही थे,कल रात! "यही हुआ था न?" पूछा चाचा जी ने,म...
मुझे ये फूट-सेंध और कूकड़ी दीं गयीं!"और शराब?" किसी की आवाज़ आई,शराब?हाँ!शराब भी!वो अंग्रेजी बेहतरीन शराब!मैं दायें मुड़ा,देखा किसने कहा था ये शराब!ये चा...
चारपाई बिछा दी,मैं बैठ गया,वो झोला,बालकों को दे दिया,बालकों ने,झट से खोल लिया,और फूट-सेंध ले भागे!सब खुश थे!अब पिता जी से,माता जी के बारे में पूछा,तो ...
गाँव के श्वान,मटरगश्ती करने लगे थे,कुछ लोग मिले,और औरतें,सभी से राम -राम हुई,और इस तरह मैं,अपने गाँव पहुँच गया,कंधे पर,मेरा छोटा बैग था,और हाथ में झोल...
वो बेचारी,फिर से लेट गई!मैं उतरा,और सोहन से मिला,सोहन खुश था!"लो बाबू जी! पहुँच गए" बोला सोहन!"हाँ सोहन!" मैंने कहा,"बाबू जी?" बोला सोहन,"हाँ सोहन?" म...
मैं यात्रा में रहा था!अब जल्दी थी घर जाने की,सोहन,कुछ गाता,और अपने बैल से बातें करता,और बैलगाड़ी,हिचकोले खाती,आगे बढ़ती जाती,और फिर,वो मंदिर आ गया,मंदिर...
अपनी आभा, खगोल में डाल चुके थे,कुछ पक्षियों की,दिन-चर्या,आरम्भ हो चुकी थी,नहर का पानी,अब साफ़ दिखने लगा था,मैंने एक बार फिर से,वो कूकड़ियाँ,और वो फूट-से...
