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"ओह..." उनके मुंह से निकला,"कभी आपने सोहन के बताये हुए गाँव में जाकर, ठाकुर बलवंत सिंह के बारे में नहीं पूछा?" मैंने कहा,"बस इतना ही बताया कि ठाकुर सा...
थूक गटका उन्होंने!लेकिन,बोले कुछ नहीं!"एक बार फिर से, बैलगाड़ी की सवारी हो जाए!" मैंने मुस्कुरा के कहा!उनके भावहीन चेहरे पर,चश्मे के नीचे से,आंसू बह चल...
इसी कारण से,इस बार आया था मैं,मैं और महेंद्र जी,एक दूसरे को कोई दस वर्ष से जानते थे,मेरे एक जानकार,अनिल जैन साहब की मातहत!पारलौकिकता में महेंद्र जी की...
चल पड़ी गाड़ी,दिल्ली के लिए! अब वर्तमान में................वे चुप हो गए,चश्मा उतारा,अपने कुर्ते से पोंछा,वे खोये हुए थे,वहीँ,उसी रात में,चालीस साल बीत...
सब!जैसा कल देखा था मैंने!आखिर आ गए हम सड़क तक!यहीं से बस मिलनी थी,और लोग भी खड़े थे,हम भी खड़े हो गए,आधे घंटे के बाद बस आई,अब भाई के चरण छुए,उनसे गले मिल...
और मंदिर ले गए,पूजा-अर्चना की,लेकिन मेरा मन नहीं लगा,मैं खड़ा ही रहा,और फिर उनके साथ,वापिस घर आ गया!घर आया,बैठा,इधर-उधर की बातें हुईं,और फिर मैंने बताय...
अब नहीं मिलेंगे वो!यही सच्चाई थी!यही थी हकीकत!अब स्वीकार करनी थी मुझे!और कोई विकल्प नहीं था!मैं उठा,और सामने नहर तक गया,नहर का पानी,गवाह था मेरा,मेरा,...
काश!मैं उठकर,बाहर आ गया,और बाहर की तरफ चला,गाँव से बाहर की तरफ,बाहर,मंदिर तक आया!और बैठ गया!कुछ जानकार मिले,हाल-चाल पूछे गए,और मैं बैठा ही रहा वहाँ!बह...
अब बिलकुल ठीक थीं वो!ख़ुशी के मारे,फूली नहीं समा रही थीं!मैं भी खुश था!और मन ही मन,उन सभी को धन्यवाद दे रहा था!जिनकी वजह से,ये चमत्कार हुआ था!क्या क्या...
वो घुड़सवार,वो पानी,वो फूट-सेंध,सब याद आ रही थीं!होले,और वो कच्चे मटर!सब याद आ रहे थे!वो बेहतरीन शराब!क्या लिखा था?हां!प्लायमाउथ!अंग्रेजी शराब थी!नीम्ब...
और कुछ नहीं!बहुत मीठा पानी था इसका!मैं कहाँ चला गया था?इतिहास में?या वे आ गए थे,वर्तमान में?इतिहास से?कुछ समझ नहीं आया!कुछ भी!मैं खड़ा हुआ,और अब वापिस ...
यहीं तो पी थी चाय?सच कहते हैं चाचा जी!अब कुछ शेष नहीं!मैं चला वहाँ से,मैंने वो टूटा रास्ता देखा,कहीं नहीं मिला,कोई रास्ता नहीं टूटा था वहाँ,सब ठीक था!...
कुआँ देखने!वो आधे घंटे में निकले,और मैं भी उनके जाते ही,फ़ौरन अपने रास्ते चला,गाँव से बाहर आया,मंदिर पहुंचा,यहां पानी पिया,और अब दौड़ा दी अपनी साइकिल!चल...
पास में ही!लेकिन कुछ नहीं था!अब ये,मेरा वहम था,और कुछ भी नहीं!इसके अतिरिक्त,कुछ भी नहीं!दिल बुझ गया!मन भर आया,आँखें गीली हो गयीं!बुझे मन से,मैं वापिस ...
ढूंढने?असलियत जानने के बाद?हाँ!जानता होगा वो!अवश्य ही जानता होगा!मैं खड़ा हुआ,बटुआ देखा,और जेब में रखा,फिर चारों ओर देखा,कोई भी नहीं था वहाँ!कोई भी नही...
