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''अरे लो बाबू जी! हम गरीब आदमी और क्या दे सकते हैं!" वो बोला,दिल में उतर गयी उसकी ये बात!चीर दिया दिल को!वो गरीब कहाँ था?गरीब तो हम थे!वो तो उठ चुके थ...
एक आदमी ने,गिलास लिए,और उन्हें पानी से,साफ़ करने लगा,मैंने आसपास देखा,मक्का लगी थी शायद!या ज्वार,या फिर बाजरा रहा होगा वो!गिलास ले आया वो,चूल्हे के पास...
और ये,उनका वफ़ादार नौकर!और तभी सामने,एक झोंपड़ी दिखी!लालटेन टंगी थी वहाँ!मद्धम सी रौशनी थी!दो आदमी बैठे थे वहाँ,और एक औरत भी थी!"आओ बाबू जी! चहा (चाय) प...
उन्हें याद आ गया,अपना वो बटुआ,जो अगले दिन,मिल गया था उन्हें!ठाकुर साहब की शिकारगाह से!"माता जी ठीक हैं बाबू जी?" बोला सोहन,"हाँ सोहन! ठीक हैं!' बोले म...
हम उतरे!उसने एक बड़ी सी,पीतल की बाल्टी उठायी,रस्सी समेत,और चल दिया उन्ही खजूरों के पेड़ के बीचोंबीच!यही वो कुआँ था!जिसके बारे में बताया था,महेंद्र जी ने...
मुंह में पानी आ गया!अब महेंद्र जी ने,एक एक हमको दी,और एक अपने लिए ले ली!"बहुत मीठी हैं! खाओ!" बोला सोहन!वाक़ई!बहुत मीठी थीं वो!वो स्वाद,आज भी याद है मु...
वो औरत,पीछे सरक गयी,उसने महेंद्र जी को चढ़ाया,और हमारे लिए,जगह बना दी!"आ जाओ बाबू जी!" बोला सोहन!और हम,अब चढ़ गए उस बैलगाड़ी में!सोहन ने देखा,कि सभी आराम...
उस आदमी ने,पहचान लिया था महेंद्र साहब को!वो जवान महेंद्र साहब,अब बुढ़ापे में क़दम रख चुके थे!फिर भी पहचान लिया था!"सोहन?" महेंद्र साहब ने,कांपती आवाज़ मे...
महेंद्र जी का दिल धड़का बहुत तेज,मुझे और शर्मा जी को,उत्कंठा का पेंच चुभा!सीने में घुसने को आमादा था!हम ठिठक कर,रुक गए!और कोई दस मीटर दूर,एक बैलगाड़ी,रु...
मान गए वो!नहीं करेंगे कोई सवाल!हम चल पड़े!उस बियाबान रास्ते पर,बस,चाँद की रौशनी ही,हमारे साथ थी,खजूर के पेड़,ऐसे लगते थे कि,जैसे जिन्नात खड़े हों,टोपी पह...
साफ़ स्वच्छ और दूधिया जान पड़ता था!चौदस के चाँद की रौशनी,खूब खिली थी!नहर के पानी पर उसकी रौशनी,झिलमिला रही थी!पेड़ आदि,जैसे आज हमारा ही इंतज़ार आकर रहे थे...
पहियों के सड़क से रगड़ने की आवाज़ आई,ये एक ट्रक था,महेंद्र जी ने हाथ दिया,तो रुक गया,उस से बात हुई,उसने नहर वाले रास्ते तक,छोड़ना स्वीकार कर लिया,हम बैठ ग...
अब सुनसान सा हो गया था वो क्षेत्र,अब कोई पैसेंजर गाड़ी नहीं थी!तो,दुकाने भी बंद हो गयीं थी!वो टूटा मंदिर,अब पक्का हो चला था!भीड़-भाड़ अब कम हो गयी!अभी कर...
पैसेंजर गाड़ी के टिकट लिए,और अब किया इंतज़ार!आई गाडी,और हम हुए सवार!इंसान पर इंसान चढ़ा था!ऐसी भीड़ थी!बुरा हाल था!लेकिन हम खड़े रहे किसी तरह!दो घंटे के बा...
और बाद में मिल भी गया था!ये सब,उन्ही का कमाल था!खैर,हम निकल आये वहाँ से,महेंद्र जी,वहीँ रह गए थे,दालें, अचार,सब्जियां, गन्ने,गुड, चावल आदि,सब रख दिए थ...
