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मेरी समझ में नहीं आई!"आओ बाबू जी" बोला सोहन,और हम चढ़ गए सभी!हाँक दी बैलगाड़ी आगे!बैल भी भागा अब!आधा घंटा बीता होगा,या कुछ अधिक!तभी रुक गया सोहन!"क्या ह...
"पेसाब-फेसाब करना हो, तो कर लो, मैं आया अभी" बोला सोहन,तभी वो औरत उठी,और उतरी,चली लंगड़ा कर,अपने घुटने पर,हाथ रख कर,ओह!ये बेचारी अपंग है!मुझे बहुत दया ...
जो बेचारा आज भी,बैलगाड़ी हांके जा रहा है,कुछ चाय पी रहे हैं!एक वो,बेचारा सत्तन,मचान पर चढ़ा है!अपने मालिक, ठाकुर साहब की,खेती संभाल रहा है!चाकरी कर रहा ...
डकार आई,तो जैसे सिरके की!फिर दूसरी खोल ली!वो भी खींच मारी!हम सभी ने!सोहन ने और की पूछी,तो मना कर दिया!इतनी बहुत थी!कहीं नशा होता, तो पता चलता,बीच रास्...
और गिलास निकाल लिए दो,बस दो ही गिलास थे वहाँ! मैंने बोतल का ढक्क्न खोला!नीम्बू की महक आई!खटास सी महक!जैसे जामुन के सिरके में से आती है!इस शराब में प...
और हम चले,राम राम की सत्तन ने,और चढ़ गया,अपनी उस मचान पर!हम आ गए बैलगाड़ी पर!और चल दिए आगे,सत्तन, अजीब अजीब सी आवाज़ें निकालता रहा,और धीरे धीरे,वो भी गाय...
रोज सत्तन,रोज चाय,रोज लोक-गीत,रोज जे कूकड़ी!रोज ये होले!रोज ये फूट-सेंध!और ना जाने,कब तक ऐसे,ही,भटकते रहेंगे!इनके लिए तो,ऐसा ही है,कि मौत के लिए,रोज रो...
ताज़ा थे वो!"बाबू जी? ये लो" बोला सत्तन,और फूट-सेंध दे दीं शर्मा जी को!"कोई झोला ना है?" बोला सोहन!"हाँ, लाया" वो बोला,झोंपड़ी में गया,और एक झोला ले आया...
और चल पड़े आगे!एक घंटा बीत गया,"रे, सोहन है क्या?" एक आवाज़ आई!"हां! आ रहा हूँ सत्तन!" बोला सोहन,और आगे चलते हुए,बाएं रोक दी बैलगाड़ी!उतरा!सामने ही,सत्तन...
मैंने शर्मा जी को उठाया,वे उठे,मैंने नीचे उतरने को कहा,वे नीचे उतरे,और अब हम सामने चले,जहां वो दोनों खड़े थे,"क्या बात हुई सोहन?" मैंने पूछा,"रास्ता टू...
करीब छह थे,एक छोटा बालक था,नंगा ही भाग रहा था!फिर सभी बालक,नहर में कूद गए!एक एक करके!कुछ समझ नहीं आया कि क्यों!वो छोटा बालक भी,सरक गया नीचे,नहर में!ये...
आँखें बंद कर लीं,अभी बहुत लम्बी यात्रा थी शेष!बैलगाड़ी,चर्र चर्र,चलती रही!मेरी आँखें बंद थीं,महेंद्र जी,सोहन के पीछे बैठे हुए थे,आलती-पालती मार के,और श...
सेम की सी बड़ी फली जैसे!उसके दाने खाये हमने,बड़े मीठे थे!दरअसल,ये शुद्ध मटर थी!बिना यूरिया की,मात्र गोबर के खाद की!कोई कीटाणुनाशक नहीं!इसीलिए,बहुत मीठे ...
मुश्क़ में पानी भरे रखता है!वही पानी पिलाता है!ठंडा, ताज़ा पानी!बहुत शांत और हंसमुख है जमाल खान!ये नंदू भी ऐसा ही हलकारा था!"सोहन?" मैंने कहा,"हाँ बाबू ...
"रे सोहन?" वो बोला,"हाँ, नंदू!" बोला सोहन,उतर गया अपनी बैलगाड़ी से,और चल दिया उस घुड़सवार की तरफ,आपस में बातें हुईं उनकी,बहुत देर तक!करीब बीस मिनट,फिर व...
