Last seen: May 5, 2026
ख़ालिस उर्दू बोलता था!जो उस समय,शाही-ज़ुबान और लोकभाषा का,दर्ज़ा ले चुकी थी!कम से कम,मुस्लिम-शासित प्रदेशों में!उर्दू की एक ख़ासियत है,इसने,अपने अल्फ़ाज़ों ...
मैं तो और ज़्यादा परेशान हो चला था!उस हलकारे ने तो,जैसे चैन उड़ा लिया था!क्या खूब तहज़ीब झलकती थी!सच में,उसके बोलने का तरीका,शालीनता ज़ाहिर करता था!ईमानदा...
"कहाँ के रहने वाले हैं आप?" मैंने पूछा,"जी बरेली के पास एक गाँव है, ***** नाम का, वहीँ रहता हूँ" वो बोला,नाम बता दिया उसने!"और अब कहाँ ठहरे हुए हो? मै...
'अच्छा" मैंने कहा,और तभी बेला के इत्र की सुगंध आई!घोड़े ने, पाँव और,अपने पूंछ फटकारे!"क्या अंदर हैं मौलाना साहब?" पूछा उसने,मुझे बहुत तरस आया!ये हलकारा...
उसकी कलाइयां ऐसी,जैसे मेरी पिंडलियाँ!गोरा रंग!आँखों में सुरमा!छोटी से करीने से रखी दाढ़ी!हंसमुख चेहरा!निक्कर पहना था,घुटने तक का,पिंडलियाँ ऐसी थीं जैसे...
कुछ और न!समझ ही न आये!सोच की,दलदल में पाँव तो क्या,समूचा बदन ही धंस गया!तीन बज गए!कोई नहीं आया!मैं लेट गया,शर्मा जी भी लेटे,और भास्कर साहब,अब नीचे चले...
कीट-पतंगों ने,वीभत्स कर दिया था,चूम चूम के!अब बजे दो!शर्मा जी को जगाया मैंने,वे भी जागे,और हम, टकटकी लगाए,सामने उस,नीम के पेड़ को देखने लगे!कि अभी आएगा...
उसकी तहज़ीब,बेहतरीन थी!मैं मिलना चाहता था उस से!अब रहा नहीं जा रहा था!इतिहास का,एक पन्ना खुलने,जा रहा था!और भी न जाने,दफन था इस हलकारे के साथ!अब हुई शा...
"इतना याद है, कि घर में कोई ठठेरा रहा करता था" वे बोले,"ठठेरा?" मैंने कहा,"हाँ जी" वे बोले,अब पड़ा मैं सोच में!"गाँव में मुस्लिम आबादी कैसी रही होगी तब...
इसका मतलब था,हलकारे के पास जो पता था,वो सही था,उसके कोई ग़फ़लत नहीं थी,किसी भी क़िस्म की!और उसका व्यवहार!वो तो कमाल का था!तज़ीब भरा!शालीन!और दो बार उसने प...
और भास्कर जी,भागे मेरे पास!और ये पूरी कहानी,कह सुनाई!एक बात स्पष्ट थी!हलकारा जो कोई भी था,आक्रामक नहीं था!सीधा-साधा और,सरल व्यक्ति था!कहीं दुबारा आ जा...
''अच्छा!" बोला अनुज!"जी, अब चलता हूँ, मुआफ़ कीजिये, आपको तकलीफ दी" बोला वो चढ़ गया घोड़े पर!भास्कर जी,सब समझ गए!गाँव के बाहर कोई मंदिर नहीं है!कभी रहा हो...
कि ये हलकारा,कुछ नहीं कहेगा उन्हें!वो उठा,और चला बाहर,भास्कर साहब भी चले उसके साथ!दरवाज़े तक आये,दस्तक हुई!"आते हैं" अनुज ने कहा,और दरवाज़ा खोल दिया,साम...
अब नींद आये ही नहीं!बार बार यही लगे कि,दस्तक हुई है!कोई आया है!सभी के कान,दरवाज़े पर ही लगे रहे!बजे दो,ऊँघते हुए भास्कर साहब की,नींद खुल गयी!भय के मारे...
वो थैले?वो क्या था?वेशभूषा भी उसकी,अंग्रेजी ही थी!जैसे पुरानी सी वेशभूषा,सर पर,फुनगी वाली टोपी!आजकल कौन पहनता है?और फिर पानी माँगा उसने,छह लोटे पानी प...
