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वो गायब हुआ,बस, उसके घोड़े की टाप,सुनाई देते रही!अवाक थे दोनों ही!अब सभी दौड़े दौड़े आये वहाँ!उन दोनों को तो जैसे,काठ मार गया था!पत्थर बन गए थे!जिंझोड़ा उ...
भय जाता रहा उनका!दरअसल,अभी सोच में ही थे,की कौन है ये हलकारा?"कहाँ से आये हैं आप?" अनुज ने पूछा,"जी, बरेली के शाह साहब के यहां से!" वो बोला,"किस से मि...
कमर में पेटी कैसे,हरा निक्कर पहने,फौजी जूते और,फौजी जुराब पहने,अंग्रेजी ज़माने की,वेशभूषा में था वो!वो नीचे उतरा,घोड़े ने टाप पटके!वो आगे आया,मुस्कुराता...
बावरा हुआ जा रहा था!कलेजा,मुंह की तरफ आ रहा था!"कोई नहीं है यहां, कोई भी मौलाना साहब" बोला अनुज!"अच्छा! थोड़ा पानी ही पिलवा दें, बड़ी मेहरबानी होगी साहब...
चलो जी,वो दिन बीता,रात आई,भोजन आदि किया गया,और फिर सब सो गए,कल वाली बात को,भुला कर,थोड़ा पूजा-अर्चना कर के,बजे रात के दो!और हुई बाहर के दरवाज़े पर दस्तक...
फिर तो,किसी को भी नींद नहीं आई!हवा हो गयी नींद!नींद का स्थान,भय ने ले लिया!किसी तरह,सुबह पकड़ी!और फिर से,वही याद आ गया!वही दस्तक!वही आवाज़! अगले दिन घ...
अनुज और उसके पिता जी भी!फिर से आवाज़ आई,"मौलाना साहब?"अनुज भाग चला,दरवाज़ा खोला!कोई नहीं था वहां!सभी आ गए बाहर!और तभी!तभी घोड़े के दौड़ने की आवाज़ आई!जैसे ...
अब उठ गए वो!अनुज भी उठ गया था!उसने भी सुनी थी वो आवाज़!दौड़ कर बाहर गए!दस्तक हुई!और दरवाज़ा खोल दिया!कोई नही!कोई नहीं था वहां!तो आवाज़ किसने दी?किसने पुका...
बाहर भी देखा,कोई नहीं था!हैरान हुए वो दोनों!अब पीछे मुड़े,जैसे ही मुड़े,और दरवाज़ा बंद किया,फिर से दस्तक हुई!अब चौंक पड़े वो!"कौन है?" अनुज ने पुकारा!कोई ...
सभी संग ही रहते हैं,आजकल,संयुक्त परिवार बिखरते जा रहे हैं,एकल हो चले हैं,ये सब,आधुनिकता का दंश है!उसी का परिणाम है!अब लोगों में,ऐसा प्रेम-भाव नहीं मिल...
गाड़ी पकड़,दिल्ली को रवाना हो गए!गाड़ी फास्ट पैसेंजर थी!सुबह ही पहुंची!कहिर,आराम से कटी रात!कोई दिक्कत नहीं हुई!यहां से हम दोनों,अपने अपने निवास के लिए च...
आग फ़ैल गयी,और ये बालक-बालिकाएं भी जल गए बेचारे!इनको बाद में,नहर में बहा दिया गया!इसी कारण से ये बालक-बालिकाएं,नहर में कूद जाते थे!ठाकुर साहब का छोटा ब...
कहानी कुछ ऐसी है,जब पूजा का सामान लाया गया वहाँ,तो पूजा आरम्भ हुई,हलवाई,सब अपने अपने काम में लगे थे!अनेकों गाँव वाले मौजूद थे वहाँ!ठाकुर बलवंत सिंह और...
और लोप!अब रह गया केवल सोहन!अब उसे बुलाया मैंने!वो खुश हुआ,महेंद्र जी से राम राम की,शर्मा जी से राम राम की,और मेरी तरफ चला!और जैसे ही आया,लोप हुआ!हो गए...
