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गन्ना?अरे मर गए!ये तो वही औरत है!यहां तक भी आ पहुंची?चाहती क्या है?बड़ा बुरा हाल! अब दो से तीन हुए!अब वो औरत,इन गोविन्द साहब को भी लपेटने में लगी थी!...
हवाइयां उड़ रही थीं!सांस ली उन्होंने,सामान्य हुए!और!"वो जो औरत है? वो नीली साड़ी बांधती है?" पूछा गोविन्द ने!उन्होंने पूछा,और इधर!महाजन और कपिल साहब का ...
आपबीती सब कह सुनाई कपिल साहब ने उनसे!आँखें फट गयीं उनकी!यदि उनके साथ ऐसा हुआ, तो भाग के जाना ही होगा कहीं!हरिद्वार या काशी!वो औरत नहीं छोड़ेगी!उन्होंने...
सामू ने भी छुट्टी ले ली!कपिल साहब ने झिड़का बहुत,लेकिन वो गरीब सकुशल रहना चाहता था!वो तो बेचारा अपनी मेहनत से ही कमाता था,अगर शरीर ही टूट जाता तो क्या ...
होंठ फैट गए थे उसके,खून बह रह था!बाबा को उठाया गया!वो उठा और यही कहा कि वो वापिस जाना चाहता है!वो मार डालेगी उसको!बस!यही कहे जा रहा था!अब तो घर में,भय...
जो जागे थे, वे अब जागते रहे!जो सोये थे!वो सोते ही रहे!हो गया खेल शुरू! अब बाबा ने अपना जौहर दिखाना शुरू किया!उस चिरपोटी को बुलाना शुरू किया!उसकी आवा...
डर से!भी से!आशंका से!पहुँच गए जी घर अपने!और उसी दिन से,प्रयास ज़ारी कर दिए किसी तांत्रिक को ढूंढने के लिए!और इस तरह,खोजबीन करते करते!एक तांत्रिक बाबा म...
कुछ नहीं हुआ उस रात!अगले दिन वापसी थी!सो अब वापिस हुए!लेकिन उस पेड़ को घूरते हुए!चल पड़ी गाड़ी वापिस!दोपहर के समय सभी ने भोजन किया,और तभी महाजन साहब चले ...
साले साहब ने अब माहौल हलके करने की कोशिश की,लेकिन हवा तो उनकी भी ख़ुश्क़ ही थी!अब भय का सबसे बड़ा ईलाज!क्या?कौन सा ईलाज?वही!वही मदिरा!चढ़ जाए तो किसी भी प...
डाल पर बैठ गयी!तालियां पीटने लगी!वो तालियां पीटे,और यहां उन दोनों को,यमराज के क़दमों की आहट सुनाई दे!वो डाल पर खड़ी हुई!और उड़ गयी ऊपर!हो गयी लोप!अब तो थ...
और उन्हें ही देखे जा रही थी!उन दोनों की तो अब बस,छलांग मार कर,कूदने की ही कोशिश रही होगी!नहीं तो प्राण तो शेष थे ही नहीं उनमे!भय के मारे,बर्फ से मुक़ाब...
गोते लगाए,पूजा-पाठ की,अपनी सभी गलतियों के लिए क्षमा मांगी!कुल मिलाकर,ढोंग कर,उस परमेश्वर को भी,सौदेबाजी में फंसाना चाहते थे!उसी शाम की बात है!कपिल साह...
तो सब भूल से गए थे!कपिल साहब के कान का ईलाज,अभी भी चल रहा था,और महाजन साहब,नकली दाढ़ बनवाने के लिए,उनका नाप दे ही आये थे,दंत-चिकित्सक के पास!पर ये क्या...
साले साहब को कुछ समझ ना आया!ना तो उसने किसी को देखा,ना ही कुछ सुना!लेकिन जैसे ही महाजन साहब सीट पर झूले,उनके साले साहब के होश क़ुतुब-मीनार हो गए!बहुत ह...
और कुछ सरसों के दाने,एक कागज़ में लपेट के दे दिए वो दाने,समझा दिया कि,हंडिया तो नदी या नहर में छोड़ देना,और ये दाने, घर में हर जगह बिखेर देना!साले साहब ...
