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मुझे देखा तो भागती हुई आई!और लिपट गयी!मैं भी लिपट गया!"कैसी हो अश्रा?" मैंने पूछा,"ठीक हूँ, आप कैसे हैं?" उसने पूछा,"ठीक हूँ" मैंने कहा!और अब उसका चेह...
मेरी खूब बातें होती हैं इस से!गोरखपुर वाले जीवेश का,दूर का ही सही, रिश्तेदार है!जीवेश नहीं आ सका था,वो नेपाल गया हुआ था किसी काम से,अब लेट गए हम!और आँ...
एक बिस्तर था वहां,नीचे बिछा हुआ,दरी पड़ी थी और एक मरा हुआ सा गद्दा था!दीवारों पर खूंटियां गड़ी थीं,हमारे कपड़े यहीं टंगे थे!तौलिया आदि!हम यहीं आ बैठे,पंख...
और सामने वो चिता थी,अधजली चिता,बेचारी की दुर्गति हो रही थी!ये भी कर्म-फल हैं!मरने के बाद भी देह को चैन नहीं!कहने को तो मिट्टी है,लेकिन ऐसी बेक़द्री देख...
करीब दो घंटे के बाद कुछ देहाती लोग आये,ये इसी शव के परिजन थे,बाबू लाल ने उनसे स्थानीय भाषा में बात की,उन सभी ने बहुत बहुत धन्यवाद किया हमारा!वे लोग ईं...
कुछ लकड़ियाँ भी थीं,वो लीं,और उस शव को ढका,जहां शव के पाँव बंधे थे,अब खुल गए थे,वो बांधे,आंतें जल तो चुकी थीं,लेकिन कुत्तों और कौवों ने उधेड़ दी थीं,वो ...
इसी कारण उस से संपर्क करते हैं!सको भय नहीं लगता!कैसे लगे!उन जैसा ही समझता है अपने आपको!खैर,मैंने अब उसको अपनी मांदलिया में डाल लिया,उसकी एक आखिरी इच्छ...
भाइयों की,माता जी की,पिता जी नहीं थे उसके,मैंने बहुत जतन किया,उसको समझाया,खूब समझाया,तब जाकर मानी वो!वो तैयार थी आगे जाने को!अपना नया सफर शुरू करने को...
गर्दन से पहिया उतर गया था,मौक़े पर ही मौत हो गयी थी उसकी,इतना ही नहीं,वो गाड़ी, भाग भी गयी थी,कौन चला रहा था, कहाँ की गाड़ी थी,कुछ पता नहीं चल सका था!ये ...
अब उसने एक कहानी सुनाई!अपनी स्वयं की कहानी!वही लिखता हूँ!आगरे का रहने वाला एक संभ्रांत परिवार,देवी-दर्शन के लिए निकला,जिस दिन निकला था,उस दिन पूर्णिमा...
अगले दिन,पहुंचे अपने स्थान,दिन में आराम किया,और फिर संध्या हुई,थोड़ा खाया-पिया,फिर हुई रात,और आज मुझे इबु को हाज़िर करना था,ताकि मैं उस औरत से बात कर सक...
वे दोनों अभी भी भयत्रस्त थे!साथ साथ ही बैठे थे,खाना नहीं खाया था उन्होंने,ना चाय ही पी थी,अभी तक वे,उन्ही दृश्यों में खोये हुए थे!और मन ही मन,कोस रहे ...
मेरी विवशता बन पड़ी थी,उसको पकड़ना!और अब उस से पूछना था,कि क्या कारण रहा कि,वो इनकी शत्रु ही बन बैठी थी!क्या दिन और क्या रात!हर समय!हर जगह इनके सामने आत...
अभी तक बना हुआ था!निकल नहीं पा रहे थे उस से बाहर!मैंने गाड़ी आगे ले जाने को कहा,सड़क पर तमाशा बना हुआ था,इक्का-दुक्का लोग,पूछने भी लगे थे,स्थिति गंभीर ह...
