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वे चली गयीं!मैं कभी अश्रा को देखता,कभी तृप्ता को!उनकी कामुक चाल ने,छलनी कर दिया मेरा मस्तिष्क-पटल!काम दहाड़ें मार मार कर,उकसाए जा रहा था मुझे!और मैं शा...
एक अशआर याद आ गया!हुस्न और इश्क़, दोनों में तफ़रीक़ है,क्या करूँ मेरा दोनों पे ईमाँ है!!!!किसको छोड़ूँ!और किसको लपकूँ!बुरा फंसा!अब मेरी और भी बातें हुईं उ...
तो नज़र हटे ही नहीं!उसका एक एक अंग!चुम्बकत्व से आवेशित था!मन तो कर रहा था,चिपक ही जाऊं चुंबक से में!"क्या नाम है तुम्हारा?" मैंने पूछा,"तृप्ता" वो बोली...
झट से खड़ा हुआ!और चला पड़ा बाहर,जल्दबाजी में,शर्मा जी के जूते पहन लिए थे,जूते पूरे नहीं आ रहे थे,लेकिन चिंता किसे थी!खर्रम-खर आगे जाता चला गया,उनको देखा...
उसने आसपास देखा,और मुझे जाने को कहा,मैंने मना किया!वो हंसने लगी!मेरी तो नैया सीधी धार में आ गयी!मैं तो खेने लगा उसको तेज तेज!मैंने फिर से इशारा किया आ...
खपरैल से बना कक्ष था वो,झोंपड़ी जैसा!लेकिन काफी बड़ा!और तभी अश्रा बाहर निकली!मुझे देखा,मैं तो ठूंठ सा खड़ा हुआ देख रहा था वहाँ!मुझे तृप्ता का इंतज़ार था!अ...
तो नकुल ने बताया मुझे कि वो कौन हैं!वे दोनों बाबा गिरिराज की पुत्रियां हैं!तृप्ता ने तो मेरे अंदर,अगन लगा दी,अतृप्ति की अगन!मैं निहारता गया उसको!जब तक...
नकुल के साथ था,तब ये अश्रा अपनी बड़ी बहन तृप्ता के संग थी,वे दोनों बातें कर रही थीं,मेरा ध्यान सबसे पहले तृप्ता पर गया,सुगठित देह थी उसकी,पतली सी कमर,औ...
अपने आपको करीब ला रहा था उसके,और वो मेरे स्पर्श से दूर जाए जा रही थी!बर्दाश्त के बाहर था वो सब!"तुम कब वापिस जाओगी?" मैंने पूछा,"अभी रहूंगी कोई चार दि...
"कल तक" मैंने कहा,चौंक पड़ी!"इतनी जल्दी?" उसने पूछा,"अब तुम देर से आओ तो मैं क्या करूँ?" मैंने कहा,"आ तो गयी न? चार बरस तो नहीं हुए?" उसने कहा!लो जी!यह...
मैं पकड़ा गया था!"सच!" मैंने कहा,"रहने दीजिये" वो बोली,"रहने दिया" मैंने कहा,वो मुस्कुरा गयी!ये है स्त्री-मन!मात्र शब्दों के जाल में फंस जाया करती है!अ...
कोई अवरोध नहीं था!इसीलिए द्रुत गति से भाग चला था मैं!अब तो खींच लिया मैंने उसे अपने अंक में!ओह! क्या बताऊँ!उस से स्पर्श हुआ,तो मेरी काम-हिम पिघली!बह च...
लेकिन किसी जाल से भी अधिक मज़बूत!और देखो!फंसने को जी चाहे!ऐसी हालत थी!मन में मेरे तो,कसक क्या ठसक ठसक भी मची थी!उसने आँखें ऊपर उठायीं,मुझे देखा,ओह!मैं ...
हालांकि उसने कोई लिपस्टिक नहीं लगाई हुई थी,लेकिन उसके होंठों में जो रक्त था,वो गुलाबी था!सुर्ख गुलाबी!ऊपर से,उसकी नाक और होंठ के बीच की,वो दरार!वो दरा...
थी तो वैसे, क्या कहूँ....कच्ची सेमल के फूल की कली जैसी!लेकिन अब,अब तो और स्निग्ध हो गयी थी!और फिर काम का क्या है!जब मर्ज़ी नींद से खड़ा हो जाता है!कोई ख...
