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बोला,"क्या करेगा?" मैंने पूछा,"आप जानते हो गुरु जी!" वो बोला,"गलत काम" मैंने कहा,अब तक सेब छील दिया था उसने,काट कर मुझे दे दिया,मैं खाने लगा!तभी शर्मा...
फिर न जाने कब हो मुलाक़ात!कब मिले समय!कब जाना हो उधर कभी!कब आना हो उसका कभी!तभी नकुल आ गया!हँसता हुआ!कुटिल सी हंसी लिए!बैठ गया वहीं,फल लाया था, वहीँ रख...
मैंने भी तो अल्पविराम ही लगाया था!पूर्णविराम नहीं!पूर्णविराम की,हां,भूमिका बाँध ली थी!यही तो करता है एक पुरुष!जीवन भर भूमिकाएं बांधता रहता है!जैसा मैं...
वो अब कस गयी मुझसे!मेरे शब्द चुभ रहे थे उसको!और ये चुभन,मात्र एक स्त्री ही समझ सकती है!पुरुष इसमें,निपट्ट-गंवार हैं!हम में उबाल आता है!और फिर शांत हो ...
एक अनूठा सा आनंद!"तुम तृप्ता हो! मुझे तृप्त होना है!" मैंने फिर से फुसफुसाकर कहा!उसने फिर से नाख़ून गड़ाए!मुझे फिर से आनंदानुभूति हुई!वो जो पीड़ा हो रही ...
मेरे इतना करीब आ गयी थी वो,कि समर्पण करने को तैयार थी!अब मुझे सम्मान करना था उसके,इस समर्पण का!मैंने तभी दो गिलास पानी पिया!और अपने आपको शांत किया!मेर...
उसने कोई विरोध नहीं किया!बस! काम-चांडाल हंस पड़ा!और मैं फंसा अपने ही जाल में! मित्रगण!कोई विरोध नहीं था!वो मेरे सामने ही थी!मैं उसके सामने थे!काम-ज्व...
उसने बोला,और मैंने उसका नंबर फ़ोन में डाल लिया!और मैंने उसको अपना नंबर दे दिया!"अश्रा कहाँ है?" मैंने पूछा,"वहीँ है" वो बोली,"क्या हुआ?" मैंने पूछा,"कु...
और खुद भी बैठ गया!"आज तो मार के ही छोड़ोगी तुम!" मैंने कहा!वो मेरा आशय भांप गयी!अपने कजरारे नयन नीचे कर लिए उसने!अपने दोनों हाथों की उंगलियां,आपस में ल...
वहाँ और भी स्त्रियां थीं,लेकिन मैं तृप्ता को ही ढूंढ रहा था!और मेरी जैसे मदद की सूर्य महाराज ने!धूप आ जा रही थी!और इस बार जैसे ही आई,मुझे सामने से आती...
कब बारिश,कब धूप!कुछ पता नहीं!सभी लोग,अपने अपने कक्ष में चुपचाप,छिपे पड़े थे!हमारी तरह ही!कोई ग्यारह बजे,मौसम खुला!और बारिश ने रहम खाया हम पर!हाँ,पेड़-पौ...
फिर से शाबास! शाबास! कहता रहा!उसके बाद भोजन किया!और सो गए हम!दो दिन बाद आयोजन था!अब तो लग रहा था कि,दस बारह दिन बाद होता तो कितना भला होता!खैर!नींद आ ...
हाथ पकड़ लिया उसका!कुम्हला गयी!हाथ नहीं छुड़ाया उसने!अजी फिर क्या था!फाटक खुला था!बस घुसने की देर थी!मैंने झट से चूम लिए उसके होंठ!और छोड़ दिया उसको!वो श...
तभी कोहनी मारी नकुल ने,मैंने देखा उसे,उसने आँखों से अपनी,बाहर देखने को कहा,मैंने बाहर देखा,वही दोनों जा रही थीं!मैं लपका वहाँ के लिए!और पहुँच गया!"इतन...
बोला कि गुरु जी कोई तरीका हमे भी बताओ!हम तो भटकते ही जा रहे हैं रेगिस्तान में,एक झाड़ी भी नहीं मिली आज तक!मेरी और शर्मा जी की हंसी छूटी!मैंने उसको कहा ...
