Last seen: May 3, 2026
बस रात्रि वाली बत्ती जलती रही,उस मंद सी रौशनी में,अश्रा मुझे ही देख रही थी!बहुत सुंदर लग रही थी अश्रा!एकदम अप्सरा सी!एक अप्सरा,जो लेटी थी मेरे सामने!उ...
अश्रा को देखा,वो सो रही थी,मैंने सोने दिया उसका,और नीचे उतर आया,अब पानी ले आया मैं दो बोतल,जब आया तो करवट बदल रही थी अश्रा,मुझसे नज़र मिली,तो उठ गयी,हा...
उसकी प्यारी बड़ी बड़ी आँखें, मुझे बहुत अच्छी लगें,देखने का ढंग,वो तो उस से भी अच्छा!आँखें बंद करे,तो तकलीफ हो!आँखें खोले,तो बदन में जुम्बिश हो!खैर,इस जु...
और फिर आ गयी गाडी भी,अब घुस गए गाड़ी में,रेलवे अधिकारी से जुगाड़-तुगाड़ किया,और हमे सीटें मिलनी शुरू हुईं,सबसे पहले मैंने बाबा को बिठाया,और उसके बाद मैंन...
रात हुई,और फिर सुबह,मेरे पास मन्नी आया था,उसने बता दिया कि यहां से गाड़ी साढ़े ग्यारह बजे है,दस बजे तक निकलना है,हमने सारा सामान तैयार कर लिया,मैंने अश्...
और मुझे भी सचते रहने को कहा था उसने!अभी मैं आगे जा ही रहा था, कि नशे में धुत्त,एक साध्वी आई,और लिपट गयी मुझसे,मैंने हटाया उसको,शर्मा जी ने भी खींचा उस...
सबकुछ सही निबट गया था,उस रात औघड़ों की चांदी थी,जम कर मदिरा चली थी,कोई कहीं लेटा था कोई कहीं लेटा था!कोई हंस रहा था,कोई रो रहा था!कोई मंत्र ही पढ़े जा र...
मैं भी रुका,"चलो?" मैंने कहा,चल पड़ी,धीरे धीरे,उसने कुरता पहना था प्याजी रंग का सा,उस पर घास चिपकी थी,मैंने साफ़ कर दी,मेरे सर से,उसने तिनके साफ़ कर दिए,...
हवा चली,और धूप ने सेंध मारी!धूप उस स्वास्तिक पर पड़ी,और वो चमका!लश्कारा मारा उसने!मैंने अब उस स्वास्तिक को,छोड़ दिया!वो झूल गया!लश्कारे मारता हुआ!मैं खड़...
और उसके होंठ अपने होंठों से,गीले कर दिए!लेकिन अब मैं सूखने की कगार पर था!कुछ ही क्षण शेष रहे होंगे,कि मैं संयत हुआ!श्वास-नियंत्रण किया,और अलग कर लिया ...
चिंगारी भड़क उठी थी!मैं फूस की तरह बस,जलने ही वाला था!मैंने उसका हाथ छोड़ा,उसने फिर से नाख़ून गड़ाए,मेरी बगल के पास,मैंने अपना हाथ उठाया,उसके कंधे पर रखा,...
कमीज का बटन खोला,और मेरी छाती के बालों पर हाथ फिराने लगी!ओह!!!!!!भट्टी सुलग गयी साहब!लपटें उठने लगीं!मैं सुलगने लगा,मेरा काम झुलसने लगा!प्यास जाग उठी!...
मैंने हाथ हटा लिया,और फिर दूसरी जगह रखा,अब उसकी मांसल जांघ पर हाथ आया मेरा,झटके खा गया मैं तो!आँख खुल गयीं!झट से हाथ हटा लिया,नहीं तो कुछ ज़्यादा ही झट...
मुझे तो लगा था कि नेतनाथ जी मना कर देंगे,लेकिन ऐसा नहीं हुआ!हुआ यूँ, कि अश्रा स्वयं भी गयी थी बाबा के पास,अब बाबा क्या करते, अश्रा की ज़िद ही ऐसी थी!"ह...
लेकिन भोजन के कारण खुमारी सी चढ़ गयी थी,उबासियां आ रही थीं,इसका भी जुगाड़ कर दिया बाबू ने,नमकीन लस्सी ले आया था,मैंने तो दो गिलास खींच मारी!मजा आ गया था...
