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मेरे तो खर्राटे बजने लगे!बहुत बुरा द्वन्द था ये,बारह से दो बजे तक का!लेकिन अब निजात मिल गयी थी!वो भी सो गयी,और मैं भी!सुबह देर से उठे हम!बी उठ चुके थे...
एक दूसरे की टांगें दबाई जा रही थीं!और एक वो पलंग!किचक-किचक की आवाज़ कर रहा था!एक एक चीज़ ने दुश्मनी कर रखी थी मुझसे!और एक ये अश्रा!सरगना थी उन सब की!आखि...
ज़िद्दी!अल्हड़!धुन की पक्की!ये रात,क़यामत की रात बना दी उसने मेरे लिए!मैं मेंढक की तरह,बचता फिरूँ,इस कामुक-नागिन से! बड़ी बुरी हालत थी!थकावट के मारे,कमर...
मैंने हाथ आगे बढ़ाया,गाउन हट गया था उसका,बदन गर्म था उसका बहुत!मेरा कौन सा ठंडा था!मैं भी तो खौल ही रहा था!फ़र्क़ इतना था,कि उसका पता चल रहा था,और मैं उब...
पकड़ लिया उसका जबड़ा!"सुनो" मैंने कहा,वो कसमसाई,और मेरे हाथ पर काट लिया!बहुत तेज!जोश में काटा था!मेरी चीख निकल जाती सच में!"मेरी बात तो सुनो कम से कम?" ...
"नहीं" वो बोली,"मैं मर जाऊँगा" मैंने कहा,"नहीं" वो बोली,"समझा करो?" मैंने कहा,"नहीं" वो बोली,ये भी नहीं, और वो भी नहीं,जो वो चाहती थी,वो मैं नहीं!किस ...
वो आधा मेरे ऊपर थी,और आधा नीचे,मेरी तो सांस ऊपर की ऊपर,और नीचे की नीचे!एक बात कहूँ?अगर यही तृप्ता होती,तो अवश्य ही, मैं इतनी देर न लगाता!झपट पड़ता!भंभौ...
यही कहा मैंने,न उसने मानना था, न वो मानी,हलके से हंसी,और अपना सर,मेरी छाती पर रख दिया!ओह!उसके अंग मुझसे छुए!और मैं फूला गुब्बारे की तरह!कहीं फट न जाऊं...
चुपचाप!ज़रा भी नहीं हिला!"सो गए?" उसने पूछा,फुसफुसा कर!मैं तो काँप गया!नींद उड़ गयी मेरी,रौशनदान से कूद,जा भागी!"हम्म" मैंने कहा,अब वो और करीब आ गयी!मैं...
और बाल सुखाये अपने,रात के कपड़े पहने और आ गया लेटने!थकावट तो थी ही,एक बला और साथ लेटी थी!थकावट तो देखी जाती,लेकिन घबराहट नहीं सही जाती!मैंने उसको आगे स...
और लेट गया!साले गद्दे ऐसे थे,जैसे पत्थर!अश्रा चली गयी गुसलखाने में,मैंने उसका बिस्तर पर रखा बैग उठकर,रख दिया अलमारी में,अलमारी भी लगता था कि,कलक्ट्रेट...
अब तो होटल का भी किसको पता होगा!शर्मा जी ही आगे गए,एक, पुलिस की गाड़ी खड़ी थी,वहीँ गए वो,और आये वापिस,पुलिसवाले ने बताया कि रेलवे-स्टेशन के पास ही कोई ज...
बैठ गए बस में!बस में बड़ी भीड़ थी!हालत खराब थी!मेरी तो टांगें ही पूरी नहीं आ रही थीं!मोड़ के बैठा हुआ था मैं!और वो बस!ऐसी चला रहा था कि,कोई बुग्घी भी आगे...
और उसको भी चढ़वा दिया,लेट गए फिर से,अब तो लेटे लेटे कमर भी सात का अंक बन गयी थी!फिर दोपहर हुई,खाना खाया,शर्मा जी आये मिलने,कुछ देर बैठे,और फिर चले गए व...
अश्रा सो रही थी,उसके वक्ष पर उसकी साड़ी सही की मैंने,उसके पाँव पर भी,बहुत सुंदर पाँव हैं उसके!जैसे ही मेरे हाथ उसके पाँव से लगे,वो उठ गयी!मुझे देखा,मुस...
