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मेरे लिए बढ़िया बात थी!और फिर सुबह हुई,हम फारिग हुए,चाय-नाश्ता किया,और फिर भोजन,उस दिन मौसम बढ़िया था,धूप खुल के नहीं खिली थी!नहीं तो मुसीबत हो जाती,अब ...
भरत सिंह ने एक काम बढ़िया किया,उन्होंने एक जीप ले ली किराए पर,मैं चला सकता था उसे,इसमें कोई दिक्कत नहीं थी,बस रास्ता ठीक हो,गड्ढे अधिक न हों,और कहीं ता...
भोजन किया,अश्रा ने मुझसे बाहर चलने को कहा,अब एक ही रास्ता देखा था मैंने तो,वही खेत वाला,वहीँ ले चला उसे,खेत पहुंचे,और बैठ गए वहाँ घास पर!पक्षियों ने श...
हमको बुलाया,और भरत सिंह के साथ हम सभी,चले खेतों की ओर,वहाँ पहुंचे,अश्रा घर पर ही थी!हर दस मिनट में मुझे,फ़ोन कर दिया करती थी!वो घंटी मारती,और मैं काट द...
नहाये धोये!और फिर चाय पी!चाय के संग परांठे भी खाये!सुरग(स्वर्ग) का सा भोजन था वो!देसी घी की सुगंध बढ़िया थी!घर का ही घी था, शुद्ध!तो मजा तो आना ही था!औ...
नकली है, कृत्रिम है!मात्र लंगूर ही इस शिलाजीत के असली पारखी हैं!शिलाजीत का पचय मात्र लंगूर की आँतों में ही होता है!वहीँ से ये पूर्ण होता है!मात्र लंगू...
अब मुझे रात की बची हुई नींद,अपने आगोश में लेने के लिए,मचल रही थी!लकिन अभी समय नहीं हुआ था सोने का,हुड़क तो लग ही रही थी,लेकिन हुड़क का मामला बड़ा कड़क था,...
खाना लगा,तो हमने खाना शुरू किया!अश्रा भी खाने लगी!और हम भोजन करते रहे! भोजन हो गया पूरा!पेट भर गया था!डकार ने खबर कर दी थी!घीया-चने की दाल थी,चूल्हे...
ये फ़र्क़ है, नहीं तो गुण वही हैं!अब सबसे पहले,तलाश करना था वो पिशाच-ग्राम!हम वापिस लौटे अब और फिर,बातें करते करते,खेत पर आ गए!वहाँ बैठे,भरत सिंह, पानी ...
ये पिशाच स्त्री का रूप धर,वो भी मादक स्त्री का रूप धर,अपने आपको देवी बताते हैं!ऐसे ही, इन पिशाचों के कई मंदिर हैं,जिनमे इन्हे भी पूजा जाता है!लेकिन भर...
पिशाच अत्यंत खतरनाक हुआ करते हैं!रक्त-पान करते हैं!इसी कारण से नहीं जाते ये ख़बीस!पिशाच अकेले विचरण नहीं करते!ये समूह में,गुट में,जोड़े में विचरण करते ह...
अब उन्होंने वो जगह दिखाई!जहां वो दोनों आदमी मिले थे उनको,सारी कहानी,फिर से कह सुनाई!जब वो कहानी सुनाते थे,तो वही क्षण जीने लगते थे!इस से कहानी,और जीवं...
मैं रुमाल से हवा कर रहा था!तभी मुझे एक बालक ने पंखा दे दिया,मैं पंखा झलने लगा,मेरे सामने वाली चारपाई पर,अश्रा बैठी थी,उसने पंखा ले लिया मुझसे,और हवा क...
टांगें अभी तक काँप रही थीं!और यहाँ से भी थोड़ा पैदल का रास्ता था,चले हम!और तब दूर से एक गाँव दिखाई दिया,यही था भरत सिंह का गाँव!आखिर,पहुँच ही गए!घर पहु...
साथ में ब्रेड-बटर था,ये सही किया था,रात खाना नहीं खाया था हमने!चाय पी,नाश्ता किया,और फिर भोजन भी कर लिया,ठीक कोई साढ़े ग्यारह बजे,हम होटल से निकल गए!अब...
