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और जैसे ही निकले हम उस कक्ष से बाहर,बाहर दिन का उजाला था!एक और झटका लगा मुझे!गली में रात थी!और यहाँ दिन!ये क्या?कौन सा समय ठीक था,कौन सा समय ठीक बारह ...
मैं तो आरम्भ कर ही चुका था!अब सभी आरम्भ हो गए!अश्रा भी खा रही थी,मैं उसी को देख रहा था!वो मुझे देख रही थी,मेरी मिठाई उठा लेती,और अपनी मिठाई मुझे दे दे...
वो कब आये हम?हम तो ऊपर ही थे?नीचे कहाँ घुसे हम?"वो टीला! चारों तरफ हैं ऐसे टीले!" वे बोले,अब कुछ कुछ समझ में आया!तो फिर वो पेड़?वो नीचे लगा है क्या?ये ...
ज़मीन पर गिरी एक सुईं भी,देखी जा सकती थी!हमको बिठा दिया उन्होंने!हम बैठ गए! हम बैठे रहे,मैं छत देख रहा था!ये किस से बनी थी?कंक्रीट तो थी नहीं,पटिया भ...
मुस्कुराये!हाथ जोड़कर,अभिवादन किया सभी का!भरत सिंह से मन्नी ने थाल ले लिया,अब वे दोनों युवक,गले मिले भरत सिंह से!"आ गए भाई!" एक बोला!"हाँ भाई!" भरत सिं...
जिन्होंने गुड माँगा था,वही सभ्रांत थे,अथवा सभी के सभी!ये जो ले जा रहा था,ये भी सभ्रांत और सुशील था!और तभी वो रुका,"आप ठहरिये ज़रा" वो बोला,हम रुक गए!सभ...
साथ साथ चलते हैं!मैं हैरान था,अश्रा भी हैरान थी,जब हम किसी भी घर के सामने से गुजरते,सांस की तेज आवाज़ आती,और वे लोग देखने लगते खिड़की से बाहर!सभी एक जैस...
उस पर लिपटा कपड़ा खोला,और वो थाल निकाल लिया!थाल देखते ही वो आदमी,चौंक पड़ा!उसने ले लिया थाल अपने हाथ में,उसको गौर से देखा,और फिर वापिस दे दिया भरत सिंह ...
कि एक बड़ी ही भयानक सी आवाज़ आई!"वहीँ ठहर जाओ!"हम वहीँ ठहर गए!लेकिन वहाँ कोई था नहीं!तभी एक पेड़ से कोई कूदा नीचे!पेड़ों पर पहरेदार!मैं उसको देखूं,कभी पेड़...
पानी अभिमंत्रित किया,और हम सब के ऊपर छिड़क दिया!वो पानी ऐसा लगा जैसे कि खौलता हुआ सा हो!एकदम गरम!और बाबा ने बुलाया सभी को,हम आ गए उनके पास,उन्होंने साम...
चाबी जेब में रखी,भरत सिंह ने अपना वो थाल,अपने सर पर रख लिया!अब हम चल पड़े बाबा नेतनाथ के पीछे,वे आगे आगे और हम पीछे पीछे,अश्रा मेरा हाथ थामे चल रही थी!...
और अब गाड़ी रुकवा दी उन्होंने!इंजिन बंद करवा दिया,मैंने पानी पिया अब,अश्रा के हाथ में था पानी,सभी उतरे नीचे,मैं भी उतरा!कमर सीधी की,अकड़ गयी थी उस सीट प...
वहाँ कच्चा रास्ता था,सूखे पेड़ थे,डाल दी गाडी वहीँ के लिए,चलते रहे धीरे धीरे,बड़ा ही खराब रास्ता था,घुमा घुमा के गाड़ी ले जानी पड़ती थी!टांगों में दर्द हो...
बाबा नेतनाथ बैठे अब,और हम चल दिए पीछे! गाड़ी भाग चली,रास्ता कच्चा तो था,लेकिन ऊबड़-खाबड़ नहीं था,आराम से चल रहे थे हम,बहुत जगह रुके,बहुत जगह जांच की,ले...
जीप में जान थी,खींच रही थी सभी को!कभी-कभार रुकना पड़ता,भरत सिंह के अनुसार ही,उनके बताये रास्ते पर चलते रहे हम,एक जगह रुके,यहाँ एक रास्ता आ गया था,अब इस...
