श्रीशः उपदंडक
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@1008
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

रात्रि आयी! विकट गुजरी! भोर हुई! आँखों में ही सबकुछ हो गया! प्रहर बदल गए! कोई आने वाला है! सुबह! कुछ सोचा और सुबह सुबह ही निकल पड़ी इथि! ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

प्रेम भड़क जाये तो हाल खराब ही होता है! अर्थात उचाट देता है दीन-दुनिया से! मैं मैं नहीं रहता और वो और वो हो जाया करता है! जी उचट जाता है! यही हुआ इथि क...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

उच्च घराने के व्यवसायी! तेरी क्या बिसात! तू है क्या? तेरा प्रेम क्या है इथि? मिथ्या-भ्रम! और कुछ नहीं! और तभी! नेत्र से प्रेम के आंसू गि...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

क्या करे? कह दे? स्पष्ट कर दे? बता दे? कहा दे कि विपुल मैं प्रेम पीड़ित हूँ! निकालो मुझे इस अगन से!’इस प्रदाह से! इस बंध से! मैं घुटती जा...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

और गाँव पहुँच, अपनी अपनी डगर चल पड़ीं! पहुंची अपने अपने घर! अब बात इथि की! इथि पहुंची अपने घर और हुई बिस्तर पर ढेर! विपुल! uska नाम विपुल है!...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

सम्भवतः प्रथम बार ही मिले थे वे दोनों किसी मानव-स्वभाव से! “धन्यवाद” पल्ली ने कहा, “जी, आपका भी” विपुल ने कहा, नमस्कार की और चल दिए अपनी डगर! ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

छिपी ना रह सकी इथि! तने से छिपती ना रह सकी वो! नज़र पड़ ही गयी विपुल की इथि पर! इथि और विपुल की नज़रें दुबारा उलझ गयीं! “जी, पूछिए?” अब सुचित ने ...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

वे चलते गये! मानव से क्या सरोकार! कौन रोकेगा उन्हें! वे नहीं रुके! चलते गए! अब भागी पीछे पल्ली! “सुनिये?” फिर बोली, अबकी रुके वे! वे द...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

इथि बदहवास! हाथ से जाने का इशारा किया! संयत हुई पल्ली अब! वे दोनों आ रहे थे, बतियाते हुए! और मार्ग के बेच में खड़ी थी पल्ली! वे आये और कर...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

दिव्य-पुरुष? तो फिर कौन? ऐसे मानस? ये क्या देखा अभी! इथि ने हाथ मारकर तन्द्रा तोड़ी उसकी! समय बीता! चार घटियां बीतीं! वे आये, उनके वार्ता...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

है न इथि? सच है न ये? फ़ौरन दोनों वृक्ष की आड़ में हुए! पल्ली को एक बार फिर से स्मरण कराया! क्या कहना है और क्या नहीं! बड़ी हिम्म्त दिखायी पल्ल...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

पल्ली को मार्ग दिखाया इथि ने! पल्ली ने उचक कर देखा! और दोनों की निगाहें उस मार्ग पर आ टिकीं! कुछ क्षण बीते! कुछ और क्षण! बड़े भारी थे वे क्षण...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

भचक्र में चाल थम गयी जैसे पिंडों की! पल्ली सुबह सुबह ही आ गयी इथि के पास! इथि तैयार! गयी तालाब तक! आज यहीं तो होना था साक्षात्कार उन परदेसियों...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

कल, पता चल ही जाएगा! अब इत्मीनान उसे! लगा जो प्रकृति आज मध्यान्ह तक विरुद्ध थी अब संग है! अब काटे समय न कटे! मध्यान्ह कैसे हो? अभी तो संध्...

1 year ago
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RE: वर्ष २०१० गोरखपुर की एक घटना

मिल गयी पल्ली! दोनों सखियों में आँखों में ही बात हुई और फिर आखिर, कह ही दी पल्ली से अपने जी की बात! पल्ली हैरान! परदेसी? वही परदेसी? वो तो...

1 year ago
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