Last seen: May 3, 2026
आगे नहीं बढ़ रहा था!अब हम खड़े हुए,तो नकुश मुझे ले गया अपने साथ!बाहर,और मेरे कंधे पर हाथ रखा!"हम वैसे नहीं हैं भाई!" वो बोला,मैं मुस्कुराया,"हमारे यहां ...
ऐसी ख़ुश्बू कि,बर्तन भी चबा डालूं!और जैसा बताया था भरत सिंह ने भोजन के बारे में,ठीक वैसा ही था!बेहतरीन!लाजवाब!पेट भर के खाया!बल्कि एक दो रोटी,फ़ालतू ही ...
ये और वो!वो और ये!ऐसे ऐसे प्रश्न!मैंने हाथ जोड़ लिए!शर्मा जी ने भी हाथ जोड़े!शीश झुकाया!"आइये" वो बोला,अब हम चले वहाँ से,आये वापिस,एक दूसरे कक्ष में ले ...
श्री महाऔघड़ का!ओह!ऐसा कैसे सम्भव?"यहां! यहां 'समाधि'(यहां समाधि का अर्थ है, देह-त्याग) ली थी उन्होंने!" वो बोला,चक्कर सा आ गया!इतना जटिल लगा ये समझना ...
मेरा मुंह खुला रहा गया,मैंने जल्दी जल्दी अपने पूर्वजों को,याद करना आरम्भ किया,छह तक मैं जानता हूँ,सात और आठ तक नहीं!मोटा मोटा कोई ढाई सौ साल,या दो सौ ...
मैंने पेटी बंद कर दी,और उस बड़ी पेटी में रख दी,और उसे भी बंद कर दिया,और नकुश को पकड़ा दी,नकुश ने ले ली,और रख दी एक तरफ,फिर आगे हुआ थोड़ा सा,और कुछ उठाया,...
मैंने तो नाम ही पहली बार सुना था!कौन रहे होंगे ये मिर्ज़ा फ़ख़रुद्दीन, पता नहीं!"ये पेटी तो फ़ारसी है" मैंने कहा,"ये फ़ारस की ही है" वो मुस्कुरा के बोला,मे...
छोटी छोटी कुण्डियाँ,सोने से बनीं!और तो और,उसमे महीन हीरे जड़े थे,एक रेखा के आकार में,ऐसी कुल,चार रेखाएं थीं उस पेटी पर,जो सामने से जाती थीं,और पीछे से ...
उसका ढक्कन पूरा खुल जाता था,उठ जाता था,चाहे फिर अलग रख दो!अंदर एक छोटी सी और पेटी थी,ये भी हाथी-दांत से बनी थी,मैंने वो उठायी,मेरी नज़र पड़ी एक जगह उस प...
कोई कोई वस्तु तो,ढाई सौ, तीन सौ साल पुरानी थी!इसका अर्थ ये हुआ,कि यहां इंसान आता रहा है!पुराने समय से,हमारी तरह!ये लोग भी आये होंगे!इसीलिए इन्होने कहा...
नकुश ने उनसे भोजन लगवाने को कहा!उन्होंने सर झुकाया,और चले गए!"आइये, कुछ दिखाता हूँ आपको!" नकुश ने कहा,मैं उठा,शर्मा जी उठे,बाकी बैठे रहे,हम चल पड़े उनक...
अंगूठों में भी सोना!नख को ढकता हुआ!पांवों में,सोने के बेहतरीन आभूषण!इस सन्सार में कभी भी,कहीं भी,नहीं देखे मैंने आजतक!अश्रा भी चकित थी!अचंभित थी!"जैसे...
मुझे तो विश्वास ही नहीं हुआ,कि मेरे साथ रात बिताने वाली ही लड़की है ये!सोने से लाद दिया था उसे!सोलह श्रृंगार क्या होते हैं,ये आज देखे थे मैंने!उसकी कमर...
"भाई भी कहते हो, और उपकार भी कहते हो!" भरत सिंह बोले,"ये हमारा कर्त्तव्य है भरत भाई!" वो बोला,"आपका नाम क्या है?" मुझ से पूछा,मैंने अपना नाम बता दिया!...
अश्रा ने मुझे देखा,फिर उस स्त्री को!तब वो, जो भरत सिंह को मिले थे,सामने से उठे,और मेरे पास आ कर बैठ गए!"आप घबराएं नहीं! आपकी सुरक्षा करना हमारा परम कर...
