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हम पीछे हो गए!नीचे जैसे भगदड़ सी मच गयी थी!अब फिर से नीचे झाँका!वहाँ स्त्रियां ही स्त्रियां थीं!असंख्य!और तभी आवाज़ हुई!झन्न! झन्न!पानी आ गया वहाँ!और वे...
उन पर लाल की जगह, सफ़ेद रंग था,खड़िया सा,पाँव भी सफ़ेद थे,खड़िया मल रखी थी शायद!तभी वो औरत,बैठ गयी,चौकड़ी मार कर,और धीरे धीरे उसने अपना सर उठाया,और उसकी नज़...
हमसे टकराया,और हम पीछे जा गिरे,चोट तो नहीं लगी,लेकिन कंकड़-पत्थरों ने,निशान डाल दिए थे हमारे बदन पर!हम फिर से उठे,और धीरे से आगे गए,नीचे देखा!जीभ बाहर ...
वो हाथों से किसी को इशारा कर रही थी!लेकिन हमे नहीं देख रही थी!कम से कम सात फ़ीट की रही होगी!बदन पर,कई जगह त्रिपुण्ड से बने थे,स्तन लाल रंग से रंगे थे,अ...
आप छत से उस चिमनी में झाँक रहे हों!जैसे कोई स्तूप हो,और उस स्तूप पर ऊपर,मध्य में कोई छेद बना दिया गया हो!और उसमे झाँक रहे हों!ऐसी बनावट थी उसकी!ऐसा तो...
ऐसे बहुत से सवाल थे,जो दिमाग में लगातार उपज रहे थे!हमे यहाँ आये दो घंटे बीत चुके थे,लेकिन अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा था!तभी फिर से आवाज़ हुई!झन्न!झन्न!बहु...
प्रत्यक्ष हो!जिस प्रकार से,मेरे मंत्र को फ़ौरन ही काटा गया था,उस से पता चलता था कि,कोई कालकूट-विद्या का ज्ञाता रहा होगा!ये विद्या, अब लुप्तप्रायः है,को...
बात क्या है?क्या चल रहा है यहां?कुछ पता तो चले?लेकिन आया कोई नहीं था!बस कोई लीला दिखाए जा रहा था!मैंने एक निर्णय लिया,वहाँ की एक मुट्ठी मिट्टी उठायी,औ...
नथुने फटने को पड़ रहे थे!जिव्हा पर,वो भयानक गंध फ़ैल गयी थी,गला कड़वा हो गया था!एक बात और,उन कटे हुए सरों पर,लाल रंग का टीका लगा था!सभी के!लेकिन ये हैं क...
कहाँ से आये?अब खुजलाना ही था सर अपना!यहां भी इतिहास अपना कोई,कक्ष खोलने वाला था!लेकिन अभी कुछ हाथ नहीं लगा था!तभी अचानक,फिर से झन्न की आवाज़ हुई!और हौद...
किलकारियाँ गूँज उठीं!हम खड़े हो गए थे अब!वे ऊपर आएंगे?बाहर तक?यही सोच रहे थे!हम पीछे हुए!हट गए वहाँ से!और अब उनके ऊपर आने का इंतज़ार किया!कोई दस मिनट हो...
और अब आँखों से ओझल हो गया!ये क्या हो रहा था?ऐसा कभी नहीं देखा था!ये पहला वाक़या था मेरा!कोई भी कुआं ऐसा नहीं देखा था मैंने!और तभी मेरी नज़र पड़ी नीचे,कुछ...
कुँए में झाँका,कुँए में पानी था!काले रंग का दिखाई दे रहा था!बड़ा ही भयानक दृश्य था वो!तभी कुँए का शांत पानी हिला!उसमे भंवर सी उठी!पानी घूमा अपने केंद्र...
और जब वहाँ पहंचे, तो,एक कुआँ सा दिखा!कुआं था वो!काफी बड़ा कुआं!प्रकाश इसी में से आ रहा था!हम आगे गए!भम्म!भम्म! दो बार बड़ी ही तेज आवाज़ हुई!लगा जैसे कि,क...
पहले श्रुति और केशव को भेजा वहाँ से,वे गाड़ी में जाकर बैठ गए,अब मैंने अपने नेत्र पोषित किये,शर्मा जी के भी,तीन चुटकियों के बाद,नेत्र खोल देने थे,चुटकिय...
