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काली-कौड़ी!उसके लिए तीन चौराहों की मिट्टी,चाहिए थी,तभी देख लड़ती!मैंने ऐसा ही किया,हम बादशाहपुर होते हुए,चल पड़े वहाँ के लिए!और पहुँच गए हम वहाँ!वहाँ सन्...
मित्रगण!अब मैंने अपनी आवश्यक क्रियाएँ आरम्भ कीं,कुछ आवश्यक विद्याएँ उठायीं,बाबा जागड़ द्वारा प्रदत्त और बतायी हुई विद्याएँ,सब जागृत कीं,उस दिन एक और घट...
अब समझ गया!बाबा जागड़ ने ये भी कहा कि,उनको हर दिन की जानकारी चाहिए,और जब मैं वहाँ जाऊं, तो काली-कौड़ी देख-क्रिया आरम्भ करूँ,ताकि बाबा जागड़ भी देख सकें!अ...
कुछ प्रश्न पूछे,और जो अब उन्होंने बताया,वो सुनकर तो जैसे मेरे कान में,पिघलता हुआ सीसा उड़ेल दिया गया!उन्होंने बताया कि,ये बंजार-विद्या का केंद्र है!इसम...
मैंने श्रुति को बहुत समझाया,लेकिन उन्होंने एक बात नहीं सुनी मेरी!अपनी साड़ी से वो खून-सना ब्लाउज,ढके ही रहीं!उस दिन कोई काम न हो सका,हमे वापिस लौटना पड़...
उनके बाएं हाथ की दो उंगलियां उतर चुकी थीं अपनी जगह से,और अब सूजन उभर रही थी!फिर भी किसी तरह,केशव और श्रुति को,उनकी गाड़ी में डाला हमने,और ले गए वहां से...
लेकिन वो जस के तस!श्रुति,उनकी आँखें बंद थीं अभी भी,उनके माथे पर पानी लगाया मैंने,कुछ तन्द्रा सी टूटी उनकी,बदन में हरकत हुई,आँखों की पुतलियाँ,बंद पलकों...
इस मंत्र से पोषित कर दिया,फिर देह-रक्षा, प्राण-रक्षा मंत्र से देह बाँध ली अपनी भी,और शर्मा जी की भी!और तभी कुछ ऐसा घटा कि,मेरे होश उड़ गए!श्रुति और केश...
काम आसान हो गया!अब मशीन ने, एक एक करके वो पत्थर हटा दिए,और जैसे ही पत्थर हटे!नीचे की तरफ जाता हुआ एक संकरा सा रास्ता दिखाई दिया!चालक ने देखा,मैंने देख...
मैं अंदर गया,और जहां खुदाई होनी थी,इस स्थान को अभिमंत्रित किया,फिर मशीन पर भी अभिमंत्रण किया,मैंने कई बार देखा था कि किसी ताक़त के कारण,मशीन खराब हो जा...
मात्र स्त्रियां ही थीं!वो तो स्वयं ही तंत्र-साधिका लगती थीं!कोई साध्वियां अथवा सहायिकाएं नहीं!उनका रंग-रूप भी बड़ा ही विचित्र था!मैंने ऐसा तो कहीं भी न...
वे बड़ी उत्सुकता और कौतुहल से,जैसे हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे,अब शर्मा जी ने उन्हें बताया,और कल ही एक जे.सी.बी. मंगवाने को कहा,श्रुति ने तभी फ़ोन लगाया उ...
हौदी,सब साफ़ नज़र आ रहे थे!और भी कुछ नज़र आ रहा था!एक बड़ा सा पत्थर,जो प्राकृतिक नहीं था!ये तराशा गया था!आकार में चौकोर था,ये पत्थर कोई दस फ़ीट लम्बा,और को...
गाल,हाथ,पाँव,हर जगह ये दाने उभर रहे थे!भयानक जलन थी उनमे!मैंने एक घूँट पानी लिया!और मुंह में रखा!विद्रक-मंत्र का जाप किया,नौ बार,मेरे पसीने छूटने लगे ...
अब वहाँ न हौदी थी,न ही वो कुआं!वो डरावना कुआँ!वहाँ पर आये, वे गाड़ी से बाहर निकले,मैं और शर्मा जी गाड़ी में बैठ गए,और अब शर्मा जी ने श्रुति को बताना शुर...
