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वहां घुप्प अँधेरा था!ये नहीं देख पाया था मैं पहले,हम आगे चले,उसके पीछे!काफी आगे तक गयी थी वो!और फिर वो रास्ता आ गया!लेकिन वो नहीं थी वहां!मैंने सामने ...
मैंने कभी नहीं सोचा था था,की कभी मैं इन चौंसठ-योगिनी की,साधिकाओं से मिल पाउँगा!अब तो ये लुप्त हैं!कहीं इनका अस्तित्व शेष नहीं!जहां तक मुझे ज्ञात है,हा...
लेकिन इस औरत पर,भरोसा नहीं था मुझे!इसीलिए मैं वहीँ डटा रहा!मैं तैयार था कि यदि उसने कुछ किया,तो मैं सबक दूंगा उसको!अभी, यहीं के यहीं!उसने फिर से इशारा...
वो बहुत लम्बी थी,मुझसे एक फ़ीट लम्बी!उसका चेहरा भी बहुत भारी था,बदन बहुत मांसल था,कंधे चौड़े थे उसके,देह बहुत मज़बूत थी!वो अजीब से शब्द बोले जा रही थी!मु...
की वर्तमान समय को,दीमक नहीं चाट गयी!अभी भी वर्तमान में ऐसे लोग हैं,जो उनसे भिड़ सकते हैं!वो हमे लगातार खेल दिखा रही थीं!अब हमे खेल का किरदार बनना था!हम...
मैं उठा,अब कुछ ठान लिया था मैंने,जो होगा,देखा जाएगा!या तो हम नहीं अब,या फिर ये भुवनिकाएँ नहीं!मैं अपना सर्वस्व दांव पर लगाने चला था अब!मैंने तभी,गुरु-...
ये क्या भ्रम था मेरा?नहीं!ये भ्रम नहीं था मेरा!मैंने शर्मा जी को भी दिखाया,वो पेड़,सच में ही काला हो चुका था!इतना ही नहीं!वहां ऊपर चीलें भी चक्कर लगाने...
लेकिन आवाज़ वहीँ से आ रही थी!हमने कान लगा दिए वहाँ,नज़रें गड़ा दीं,आँखें खुल के भट्टा सी हो गयी थीं!आवाज़ बहुत कर्कश थी,हमारे तो दांत भी खट्टेपन का स्वाद ...
लगता था जैसे,उनका खेल बंद हो गया हो!लेकिन खेल बंद नहीं हुआ था!हौदी के नीचे से फिर से आवाज़ें हुईं,मैंने गौर से सुना,ये कोई पुरुष था!पुरुष!पहली बार सुना...
नीचे देखा,वो हाथ वहीँ थे,जैसे कोई टेक लेकर खड़ा हो उस खिड़की के अंदर से!मैंने अपनी दिशा बदली,खिड़की के सामने आया,और देखा,तभी आवाज़ हुई झन्न! झन्न!मैं हटा ...
कुछ नहीं हुआ,मैं और नीचे उतरा,धीरे धीरे,और कोई पांच फ़ीट तक आ गया,फिर और नीचे हुआ,धीरे धीरे,अब टोर्च जला ली,और चला खिड़की की तरफ,आ गया वहां,खिड़की के साम...
वो खिड़की!क्या था इसका राज?अब यही जानना था!ये कोई दस-बारह फ़ीट नीचे थी,इसके अंदर क्या है,ये जानना था,और इसके लिए,हम में से एक को नीचे जाना था!रस्सी के स...
उन सभी मृत शवों को,पकड़ कर,खींच कर,ले गयीं वहां से,ये हैवानियत की हद थी!मैंने ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा था!मैंने प्रेतों द्वारा इंसानों को,सजा देते देखा ...
वो इन शिशुओं को भी काटना चाहती थीं!बड़ा ही वीभत्स दृश्य था!अब न रहा गया!मैं चिल्ला पड़ा!रुकने को कहने लगा!ये जानते हुए भी कि,वे शिशु तो अब जीवित हैं ही ...
एक स्त्री का धड़ पड़ा था,उस कटी हुई स्त्री का सर,एक दूसरी स्त्री ने उठाया हुआ था,दूसरी स्त्री अब,उस तड़पते धड़ को अपने घुटनों से दबाये हुए बैठी थी,रक्त का...
