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कोई भय नहीं?ऐसा कैसे?शर्मा जी मुझे देखें,और मैं उन्हें!सबकुछ सर के ऊपर से गुजर रहा था!जो नाच रही थीं,अब वे बैठीं,और कुछ और उठ गयीं!तभी एक अलग प्रकार क...
हम आगे चलते रहे!और एक जगह रुक गए!यहाँ तो सब,वही साधिकाएं थीं!कम से कम चालीस!सभी की सभी उसी पीले रंग में रंगीं!कुछ नाच रही थीं,घुंघरू बांधे!कुछ गा रही ...
चल पड़े उधर,आवाज़ तो लगता था कि,पास में से आ रही है,लेकिन वहां था कुछ भी नहीं!अब मैंने कलुष-मंत्र का सहारा लिया,मंत्र लड़ा,और हम दोनों के नेत्र पोषित हुए...
और सो गए,कुछ देर आराम ज़रूरी था!कुछ ही देर में,हमारे खर्राटे बजने लगे!खिड़की खोल रखी थी हमने,वहीँ से कभी कभार हवा आ जाती थी,चांदनी का ही सहारा था वहाँ,न...
अब हम स्वयं ही फ़ोन करेंगे उसे,वो डर तो रही थी,लेकिन विश्वास था उसे!हम चार दिन से,टकरा रहे थे यहां की इन शक्तियों से!लेकिन एक बात बहुत हैरान कर देने वा...
सात का वक़्त रहा होगा,और फिर हम वापिस लौटे,कार की तरफ,कार तप रही थी अंदर से,उसको खुला छोड़ दिया थोड़ी देर,पानी पिया अब,पानी भी खौल गया था!किसी तरह से,हलक...
वो लड़की वहीँ खड़ी थी,सुबकते हुए,मैं उसके पास गया,वो नहीं डरी अब,मैंने उसकी हालत देखी,बहुत दयनीय हालत थी उसकी,उसको बहुत पीटा गया था,उसके हाथों,पांवों,और...
वहीँ से देखा,एक युगल,रति-क्रीड़ा में मग्न था,स्त्री की पीठ हमारी तरफ थी,पुरुष को देख नहीं पाये थे,हम हट लिए वहाँ से,धीरे धीरे निकलने लगे वहां से,और फिर...
हम तो दुश्मन थे उनके,हमे छोड़,वे कहाँ भाग गयीं सारी की सारी?किसलिए?हम भी भागे वहाँ!लेकिन यहां तो रास्ता बंद था!कोई भी रास्ता नहीं था वहाँ!फिर कहाँ गयीं...
कौन है?वो चीखी थी!और इसी कारण से अब वहाँ,करीब दस और भुवनिकाएँ आ धमकीं!सभी अपने हाथों में खड्ग लिए!सभी, हमे घेरे हुए!लेकिन दूरी बनाते हुए!सभी हमे ही दे...
लेकिन कभी इंसान थी!और इसी कारण से,वो भटकाव में थी!उसने जो शब्द कहा,वो मेरी समझ में आ गया!प्रधान योगिनी बहरूपा!हाँ!बहरूपा!तो ये बहरूपा की साधिकाएं थीं!...
उंगलियां काट दीं,जीभ काट दी,सर दो-फाड़ कर दिया,सर का कटोरा,अलग कर दिया गया था बेचारी का!उसको देख कर,यही लगता था कि वो,अविवाहित ही रही होगी,अपनी मौत के ...
अंगूठे भी,तरस आ गया उसकी हालत देख कर मुझे!अब मैं आगे गया,उसने अपने कटे हाथ की उंगलियां दिखा कर, मुझे रुकने को कहा,मैं रुक गया,"घबराओ नहीं" मैंने कहा,औ...
स्तन पर कोई रंग नहीं था,कोई चिन्ह नहीं था!वो बस,अपलक हमे ही देख रही थी!उसके केश छोटे ही थे,कंधे तक ही,बदन था तो मज़बूत,लेकिन मांसल नहीं था,पसलियां दीख ...
कि, ये रक्त आ कहाँ से रहा है?टोर्च को ऊपर किया,छत तक ले गया,वहाँ एक परछत्ती सी थी,और वहाँ!वहाँ, लाशें रखी हैं!बंधी हुई!किसी भी लाश का सर नहीं था!रक्त ...
