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"कल जा रहे हो?" पूछा ऊषल ने,इस सवाल से,मुंह कड़वा हो गया उसका!चीर के रख दिया उसका दिल!"हाँ, जाना तो पड़ेगा" बोला औरांग,"और वापसी कब?" पूछा,"एक माह तो कम...
और तब,उसे नज़र आई ऊषल,साथ में वही लड़की थी,दिल धड़क उठा!देह में स्फूर्ति आ गयी!उसकी प्रेयसी जो आ रही थी!वो हटा बुर्जी से,और चला बावड़ी के मुख्य-स्थान की ओ...
और विदा ली,दिल बहुत भारी था उसका,और ये खल्लट,खल्लट अब चुभने लगा था उसे!उस सारे दिन,उसने प्रतीक्षा की ऊषल की,ये जानते हुए भी,की नहीं आ पाएगी ऊषल!क्योंक...
लेकिन बोल नहीं पाया!कौन बोलता खल्लट के सामने!किसी की नहीं चलती थी उसके सामने!खल्लट की बात,अकाट्य थी,उसकी इच्छा,हुक्म था उसका!और हुक़्मतलफ़ी कोई नहीं कर ...
ढूंढ रहा था वो.अपनी कनखियों से उसे! अब हाल चाल पूछा खल्लट ने औरांग से!औरांग ने अपना हाल-चाल बताया!खल्लट के पास पोटलियाँ रखी थीं,खोल कर दिखायीं उसने ...
ऊषल के ही आये!हुई सुबह!और उसको खबर मिली!रात को ही आ गया था खल्लट!ओह!अच्छा!इसी कारण से!इसी कारण से नहीं आई!नहीं आने दिया होगा खल्लट ने!पूरा महीना दूर थ...
हल नहीं निकलता था!अब तो ऊषल ही,कोई राह सुझाये तो सुझाये!उसे तो मालूम नहीं!लेट गया थक-हार कर!और फिर हुई संध्या!दीप जलने लगे घरों में,उसने भी जला लिया,औ...
ओह!दिमाग घूम गया औरांग का!हाँ!कल आ जाएगा खल्लट!फिर कैसे होगी मुलाक़ात?ये तो सोचा ही नहीं उसने?अब वो भी चिंतित!वो चलने लगी वहाँ से!भागने लगी!रोक लिया उस...
और आह भरती हुई ऊषल,उसको बांधे रहती!आगे नहीं बढ़ने देती!यही तो खेल था!इसी खेल में,झुलसाना था उसे!तड़पाना था उसे!औरांग ने तो,सारे हथियार डाल दिए थे अपने!व...
लकड़ी सुलगती रही!धुंआ उठता रहा!बस फूंक की ज़रूरत थी!और ये फूंक,केवल ऊषल ही मार सकती थी!और तभी!तभी आई ऊषल!मुस्कुरा पड़ा देख कर उसे औरांग!वो भी मुस्कुराई!अ...
जिसे करने को,अब तड़प सा उठा था औरांग!सुबह हुई!रात की घटना याद आई उसे!फिर से कसक उठी,सूर्य को देखा,अभी तो बहुत समय था!मिलने में,ऊषल से!अब तो उसको अपना अ...
बस चुकी थी!उसकी भुजाएं,फड़क रही थीं!ऊषल को जकड़ने के लिए!तपन थी!बहुत तपन!वो उठा!और पानी पिया!मदिरा तो,कब का उड़ चुकी थी!अब तो!ऊषल की मदिरा की चढ़ी थी!खुमा...
भर लिया उसने ऊषल को अपनी भुजाओं में!हार गया उसका विवेक!और जीत गयी ऊषल!उसके गले लगी ऊषल,मुस्कुरा रही थी!आँखों में आंसू लिए!ये आंसू कैसे थे?ख़ुशी के आंसू...
कुछ प्रतिक्रिया कर पाता,गले से,कस के लिपट गयी ऊषल!अब न हटा सका उसको!"औरांग!" हलके से बोली ऊषल!औरांग बेचारा बेहोश होने को!"औरांग! मैं प्रेम करती हूँ तु...
थोड़ी सी दिक्कत हुई उसे!खांसा,थूक गटका,और फिर से सो गया!फिर से यही किया ऊषल ने!और अपना नाख़ून उसके एक होंठ पर दबा दिया!चौंक पड़ा वो!आँखें खोल दीं!और ऊषल ...
