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और प्रतीक्षा करने लगा,ठीक आधे घंटे बाद,दो घोड़े आते दिखाई दिए,ये ऊषल थी,एक घोड़े पर,और एक पर वो लड़की!संग लायी थी वो उस लड़की को अपने!कोई बात नहीं!अच्छा ह...
निकल पड़ेंगे वहाँ से,हमेशा के लिए!एक होने!न कोई रोक-टोक होगी!न किसी का कब्ज़ा!बस प्रेम!और प्रेम!और कुछ नहीं!हो गया निर्णय!आधा घंटा पहले,औरांग निकलेगा,और...
औरांग को मिलना था ऊषल से!वो तैयार था!ऊषल का खेल,अब अपने अंतिम चरण में था!प्यादा आगे बढ़ चुका था!सही जगह ले चुका था!बस, अब राजा को शय देना ही शेष था!जा ...
खल्लट का सारा सौदा,यौम का हो जाएगा!वाह ऊषल!तेरी योजना से,अब कितने लोग तलवार की भेंट चढ़ेंगे,देखती रहना! एक दिन रहा वहाँ औरांग!जितना उसने माँगा था,उस ...
खल्लट को भी जानता था!खल्लट के साथ पुरानी रंजिश थी उसकी!इसका फायदा मिलना तय था औरांग को!अब दज्जू उसको ले गया,उसके रहने के कक्ष में!उसको भोजन करवाया,जो ...
सारा दिन चला,सारी शाम चला,और फिर,फिर रुका सराय में!अगली सुबह फिर चला!और दोपहर तक,वो पहुँच गया,नेहटा!यहीं रहता था वो दज्जू!यहाँ के लोग भी,वैसे ही थे,खल...
वे ख़ुशी से,और निर्भय नहीं रह सकते!इतना विचार कर,चली गयी थी ऊषल!और औरांग!अब आसमान में विचरण कर रहा था!उसका उद्देश्य खल्लट के पीछे खड़ी,ऊषल थी!ये खल्लट,ख...
जो लड़ सकें,भिड़ सकें,क़त्ल-ओ-ग़ारत मचा सकें!फिर घेरा जाएगा खल्लट को,खल्लट से आमने सामने की लड़ाई भी हो सकती है!इसीलिए,वो जो आदमी चाहियें,वे कुशल होने चाहि...
चाहे कहीं भी छिप जाएँ जाकर!और ऐसा कोई नहीं,जो खल्लट से टकरा सके!ये थी असली समस्या!लेकिन इसका भी निदान किया औरांग ने!बता दिया कि वो कहाँ जाएंगे!वहन खल्...
ये तो तोहफा मिला था उसको!अब खूब लाग-लपेट की उसने!कि चिंता न करे वो,सब देख लेगा,कोई दिक्कत नहीं होने देगा!आदि आदि!और उसी दोपहर,खल्लट अपने साथियों संग,च...
यदि ऐसा सम्भव है,तो ऐसा ही सही!बस,कुछ देर-बदल करना होगा उसको!इस खेल में!बस, कुछ बदलाव! दिन बीते,चार दिन बीत गए,औरांग बड़ी मुश्किल में था,रह रह कर उसे...
अबकी बार भी!कोई चूक नहीं!कोई कमी नहीं!सटीक वार!औरांग भर गया था,जितना भरा जा सकता था,उतना भर दिया था ऊषल ने,औरांग को!अब,औरांग ने उसे,अपना सोच हुआ निर्ण...
पहुँच गया वो वहां!वो वहीँ खड़ी थीं!अंदर,एक ओसारे में.वहीँ चला औरांग!लड़की हट गयी,दूर खड़ी हो गयी!उनके बीच अब बात हुई!खल्लट के बारे में,बहुत कुछ बताया उसन...
वो मिली नहीं,और कोई खबर भी नहीं!अब औरांग,खल्लट से चिढ़ने लगा था!मन ही मन,घृणा होती थी उसे!उसकी प्रेयसी पर,उस खल्लट का कब्ज़ा था!कब्ज़ा कैसे टूटे?वो मानने...
दिल धड़क उठा उसका!वो भाग चला उस लड़की की तरफ!और जो खबर मिली वो ये,की खल्लट ने नहीं आने दिया उसे,अब तो भभक उठा औरांग!लड़की चली गयी खब देकर!औरांग!गुस्से के...
