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तारीख़ के सफ़ों में दर्ज़ हो गए!वो जीभ कटी लड़की, वही थी,ऊषल के साथ आने वाली,वो आदमी,जिसके बंधन मैंने काटे थे,वो दज्जू ही था!और ये दज्जू ही था,जिसने ये खु...
यौम ने उसे ऐसी सजा दी,जिसकी कल्पना कभी खल्लट ने भी न की थी!उसके हाथ पाँव काट दिए गए,और बाँध दिया गया कमर में रस्सी डालकर!घोड़े के साथ घिसटने के लिए!और ...
यौम चिंतित था!औरांग और दज्जू,नहीं लौटे थे!ऐसा होता नहीं था!आशंका हुई,और यौम,अपने बारह सौ साथियों को लेकर,चल पड़ा उसी रास्ते पर,जहां वे दोनों गए थे!उसका...
जब उसने कुछ नहीं बताया,तो उसके हाथों की सारी उंगलियां,पांवों के अगले हिस्से,और जीभ,काट दी गयी!ऊषल!अपने खेल में सफल तो हुई थी,लेकिन,आखिरी चाल में,राजा ...
सारी साधिकाएं,तलवार की भेंट चढ़ती गयीं!लेकिन ऊषल नहीं मिली!और जब ढूँढा,तो कहीं नहीं मिली!हाहाकार मचा था!खल्लट के टोले के,सभी घोड़े,लाल हो गए थे!खून के क...
और सुबह के वक़्त,पहुँच गए वे उन भुवनिकाओं के डेरे पर!अब उतारा दज्जू को!दज्जू ने अपनी माँ को बुलाया,और अब हुई खल्लट की क्रूरता आरम्भ!एक ही वार में,आंतें...
तैयार हो गया,सारा हाल बताने को!उस ऊषल का पता बताने को!और इस प्रकार,खल्लट को पता चल गया उस ऊषल का!ऊषल ने,जिस थाली में खाया था,उसी में छेद किया था!अब ऊष...
ऐड़ी के ऊपर से,अब न चल सकता था,और न हाथ ही उठा सकता था!इतना ही नहीं!गरम सलाखों से,उसकी आँखें भी बींध दी गयीं!लेकिन मुंह नहीं खोला उसने,नहीं बताया कि उस...
खल्लट के डेढ़ सौ आदमियों ने,घेर लिया था उन चालीस-बयालीस आदमियों को!दो महीने से,खूब नज़र रखी थी खल्लट ने उन पर,उनको आवाजाही पर!अब पकड़े गए थे!जंग हुई,और द...
और फिर,एक हफ्ता बीत गया!खल्लट की कोई खबर नहीं आई!एक हफ्ता और बीता,कोई खबर नहीं!औरांग दुविधा में था,क्या शांत हो कर बैठ गया खल्लट?ये फिर,ये भी कोई चाल ...
खल्लट की!और आगे की रणनीति अब बैठ के बनानी थी!यूँ तो यौम बहुत कुशल था,लेकिन फिर भी,यौम को अगर,उस खल्लट की जानकारी दे दी जाए,तो और मज़बूती मिल जायेगी!वे ...
और उस लड़की को,उस डेरे में,सम्मिलित कर लिया!दज्जू ने,सब समझा दिया था माँ को!और उसी दिन,वे दोनों वहीँ से,वापिस हो लिए!जाते हुए औरांग चिल्ला के बोला था!'...
वचन के ऊपर,जंग छिड़ जाती थी!प्राण चले जाते थे,लेकिन वचन नहीं!अगले दिन,यौम के अनुसार,उनको जाना था,उस भुवनिकाओं के पास!जहां वो ऊषल और वो लड़की,सुरक्षित रह...
पौधा बनकर पेड़ बनने जा रहा था!ऊषल ने,सौंप दिया अपना प्रेम उसे!स्वीकार कर लिया उसे!औरांग!सबसे भाग्यशाली समझ रहा था अपने आपको,उस रात!मिलन हुआ था!अगन कुछ ...
आराम करते,घोड़ों को पानी पिलाते,और फिर चलते,फिर रात हुई,फिर सराय में ठहरे,और सुबह फिर चले!और आ गए नेहटा!यौम का डेरा!वहाँ पहरेदार मिले,उनको जानता था औरा...
