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वो और कसती रही!मेरी तो जान पर बन आई!और तभी वो चिल्लाई!बहुत बुरी तरह!मुझे फेंक मारा उसने!दूर हटी,और उसके बदन में,जगह जगह काले दाग उभरने लगे!मैं भाग चला...
मैं डर गया उसको देखकर!उसने मुझे मेरे कंधे से पकड़ा,सर्द हाथ था उसका बहुत!और एक तरफ ले जाने लगी,मैंने शर्मा जी का हाथ पकड़ लिया,लेकिन अधिक देर तक नहीं!उन...
और तभी!तभी एक बहुत ही सुंदर स्त्री ने प्रवेश किया वहां!बहुत सुंदर थी वो!उसका बदन,अप्सरा जैसा था!मैं तो देखता ही रह गया उसे!अपने गले में,अपनी पतली कमर ...
कष्ट है,सब पता चल रहा था,वो आ गयी वहाँ तक,और इस साधिका के पास आ कर,लेट गयी,कमर के बल लेटी,और हमें देखने लगी!वीभत्स दृश्य था वो बहुत!साधारण व्यक्ति तो ...
टिका हुआ था!अभी तक! बहुत ही खौफनाक मंज़र था!वो बालक,स्तनपान किये जाता,और हमे घूरे जाता,आँख से आँख मिलाता,बिना पलक मारे!और वो साधिका,अपलक हमे घूरे!मंत...
वैसे तो वो,निहत्थी ही थी!लेकिन उसका शरीर ऐसा विशाल था कि,मेरे जैसे को,एक हाथ से पकड़ कर,ही दीवार पर दे मारती!सामने आते हुए,रुक गयी वो!शर्मा जी को देखा,...
ऐसा क्यों होता था यहां,समझ नहीं आ रहा था,अब हम आगे बढ़े,उस लौ की तरफ!वहाँ एक साधिका बैठी थी!हमे ही देख रही थी!बहुत भयानक थी वो!उसके बड़े बड़े केश,उसके वक...
पत्थरों पर आराम से आगे बढ़े,और फिर दायें हुए,यहां से,कक्ष में नहीं गए,हम सीधे गए,घुप्प अँधेरा था,गर्मी थी,हम आगे बढ़ते रहे!और फिर सामने,वो रास्ता खत्म ह...
टोर्च हमारे पास थी ही,छोटे बैग में,जो मैंने लटकाया हुआ था,अब हम नीचे चले!बड़ा झाड़-झंखाड़ था वहाँ!जो उखाड़ा गया,वो उखाड़ दिया,जो नहीं,वो रहने दिया!टोर्च जल...
नागिन,अपना छोटा सा फन फैलाये,नाग के फन के नीचे सरक गयी थी!ये उसकी रक्षा के लिए किया था उसने,कि हम यदि कोई वार करें उन पर,तो नागिन को ही चोट लगे,उसके न...
ब्रेड-मक्खन लगवा लिया था,चाय के साथ खींच लिया!और फिर कुछ देर आराम किया,वहीँ बिछी चारपाई पर,कमर सीधी करनी थी,गाड़ी में तो ऐसा लगता था कि,जैसे किसी डिब्ब...
तो अब हम हटे वहाँ से,गाड़ी तक आये,गाड़ी चालू की,और निकल लिए वहाँ से,बाहर जाकर,ताला लगाया उस बाड़ को,चाबी संभाली,और चलते बने वहाँ से,गाड़ी भगाई,और एक जगह र...
उनके प्रचलन!यही दृश्य,हमे दीख रहे थे!मुझे औरांग का बहुत दुःख था,ऊषल का क़तई नहीं,ऊषल तो जानती थी अपनी नियति!लेकिन ये बेचारा औरांग,बीच में आ गया!और बन ग...
और मित्रगण!जी चार पुरुष मैंने देखे थे,उनमे से दो,वे सभी दज्जू के सहायक थे!वे भी भेंट चढ़ गए थे,खल्लट और यौम के युद्ध में!अभी मैं सोच ही रहा था उनके बार...
बेचारा औरांग!और वो ऊषल!कभी नहीं मिली मुझे!शायद,मुक्त हो गयी होगी,कहीं अन्यत्र जन्म लिया होगा उसने,भूल गयी होगी सबकुछ!मित्रगण!ऐसे ही हम!न जाने क्या इति...
