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यहां जो कुछ भी हुआ था, उसके बारे में, एक एक जानकारी, सामने आती चली गयी! मेरे प्रश्न पूर्ण हुए, और मैं, उसके लोप होते ही, पीछे गिर पड़ा! बदन भारी हो...
न और था, और न ही छोर! अब मुझे ही कुछ न कुछ करना था, एक बात और, ये प्रेत, अपने आप ही प्रकट हो रहे थे, वे सभी भयभीत थे, लेकिन किस से? यही पता चल जाता...
और बनाने वाले ने ऐसा बनाया था, कि कटोरा भी चबा लिया जाए। हमने मोटे मोटे गिलास बनाये, और पीते चले गए। रम ने काम किया! गर्मी लगी! अब उसका मतलब ही यही...
न चिता! नधुआं! कुछ नहीं! बस सन्नाटा! हम चल दिए फिर वापिस, और धीरे धीरे उतरते हए, आ गए नीचे, मित्रगण! यदि आप, कभी भी कोई भी, एक सिद्धि प्राप्त कर लेते ...
और बन गया खंडहर! वर्तमान में आ गयी वो हवेली! ये सब, देखते ही देखते हए था! हमारी आँखों के सामने! अब कोई पढ़ा नहीं फूल वाला, कोई पेड़ नहीं, कोई घास नहीं...
सांकल किसी मोटे बांस सामान थी! दरवाज़े पर, कोई पहरेदार नहीं था! हम अंदर घुसे, फूलों के पुढे थे वहां! लाल-पीले, हरे, सफ़ेद! झूम रहे थे! तितलियाँ दौड़ र...
आंसू बस टपकने ही वाले थी कि, अम्मा ने, अपनी जेब में हाथ डाला, और एक छोटी सी फली निकाली, बड़ी फलियों में से, और दे दी मुझे, मैं मुस्कुरा गया मैंने फ...
वो हवा में ही, राख बन उड़ गया! वो खड़ी हो गयी! एक डंडी थी उसके पास, मुझे दिखाने लगी। मना करने लगी, की मैं वहाँ न आऊँ, मैं रुका नहीं, आगे बढ़ता रहा!...
एक नया किरदार! "तो यहां क्यों छिपे हो तुम सब?" मैंने पूछा, "बाट देख रहे हैं" वो बोली, "किसकी बाट?" मैंने पूछा, "माधौ और जगन की" वो बोली, ओह! वही...
मज़बूत थी, जेवर धारण किये हुए थे, पांवों में, ठेठ देहाती किस्म के, ज़ेवर पहने हुए थे, भारी भारी पायजेब, हंसलियाँ, और कुछ और आभूषण, हाथों में भी, ...
वो जैसे, शोक मना रही थी! लेकिन दिखाई नहीं दे रही थी! महेश जी और हरीश जी, खेतों के बाहर ही खड़े थे! वे डरे हुए थे, मैं समझ सकता था। अब हम आगे चले, आवाज...
तो दोपहर पकड़ी, अभ भोजन किया, दाल थी उरद की, साथ में भिन्डी की मसालेदार सब्जी! सिरके वाले प्याज और बड़ी बड़ी मिर्चे। चटनी लाल मिर्चों की, लहसुन वाल...
आठ-दस बालक! सब बड़ा ही विचित्र था! अचानक कैसे, और कहाँ से आ गए वो? अब तक कहाँ थे? अब इसका उत्तर तो, वही दे सकते थे! और इसके लिए, हमे वहीं जाना थ...
जान ले रखी थी ठंड ने तो! । अगले दिन हम अपने स्थान पर चले गए, और उसी दिन, हरीश जी से बात हुई, वे बालक अभी तो नहीं दिखे थे, अगर फिर से दिखे, तो अव...
अच्छे-खासे रसूख वाले व्यक्ति हैं, खेत हैं उनके पास, और अपना कुछ व्यवसाय भी है, उनके दोनों बेटे उसी में इनका हाथ बंटाते हैं! वे घबराये हुए थे, न जाने क...
