श्रीशः उपदंडक
श्रीशः उपदंडक
@1008
Admin
Member
Joined: Apr 29, 2024
Last seen: May 3, 2026
Topics: 245 / Replies: 9254
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

वो मेहर, वो मदिरा! सब याद आ गयी थी! अगला दिन हुआ, तो लगा बरसों बीत गए! अपनी मेहबूबा से मिले! दफ्तर पहुंचे, तो मन न लगे किसी भी काम में, कुर्सी पर, ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और अगले दिन, अपना सामान उठा कर, वे भी चल दिए! शहर के लिए! जयपुर का ख्वाब लिए! दफ्तर में, जुगत-भिड़त लगानी थी, जयपुर हो जाए तबादला तो, जिंदगी का सबसे ब...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और आखिर में, हो गए खोखले! टेक दिए घुटने! दर्द, जो जा छिपा था, अब फिर से हावी हो गया! नूर ने, मदद की! लेकिन नूर का स्पर्श होते ही, झुलसने लगते थे...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और अब विदा लेनी थी! मन तो नहीं कर रहा था, लेकिन जाना भी आवश्यक था! तब, नूर ने बताया, कि कल सुबह चली जायेगी वो यहाँ से, अन्य साथियों के साथ, ये सुना, अ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

लेकिन ये कहाँ पता था उन्हें! वो तो बेचारे, जितना दम था उनमे, भिड़े हुए थे! दो बार में, अपनी सारी जवानी का जोश उतार बैठे थे! अब उठी नूर! बाहर गयी! बेचा...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और उसके अंग! चीख चीख कर जैसे, सूरज साहब से गुखार लगा रहे थे कि, उनको आज़ाद करो! पास आ बैठी! अब तो आवेश चढ़ना ही था! ऊपर से उसका लगाया हुआ, वो मा...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

अब सड़क से मुड़े, और डाल दी साइकिल, उस रास्ते पर! तेज तेज! भागम-भाग! और दिखाई दी वो हवेली! जान में जान आ गयी! और अब दौड़ा दी साइकिल! आज तो नए...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

अब तो! सर कनस्तर में, और हाथ कड़ाही में थे उनके! सूरज साहब के! लेकिन तभी आई घर की याद! वे उठे, और दरवाज़ा खोला, सुनसान पड़ी थी हवेली, शायद सो रह...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और जुटाई हिम्मत! देह में जहां जहां ताकत बची थी, बुला ली गयी 'एक' जगह! और रम गए फिर से! इस बार संघर्ष विकट हआ! आखिर संग्राम था ये, इसीलिए! ...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और चूर होते नूर के साथ! नर ने उस रात, बड़ी 'सेवा' की, हमारे सूरज साहब की! ऐसी सेवा, जो उन्हें अब इस जिंदगी में तो, शायद ही नसीब होती! उनका तो जी कर...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और रख लिए अपने ऊपर! अब बाकी का काम, उनके हाथ जानते थे ही! सभी आनंद ले रहे थे! फिर उस रक्काशा ने, अपने हाथ से मदिरा परोसी, और पिलाने लगे उन्हें म...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और फिर शराब लायी गयी! बेहतरीन शराब! वो परोसी गयी, साथ में सूखे मेवे आदि भी! सूरज साहब ने, खींच मारे दो गिलास! शराब थी या शहद मिला पानी! ऐसी शराब तो...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और डील डौल, किसी पहलवान की तरह था! ऊपर शरीर पर, सोने की मालाएं पहनी थीं, सोने के कड़े! और एक छोटी सी, कसी हुई कमीज, मर्दाना कंधे साफ़ दीख रहे थे...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और लोटे में से, वो अफीम का घोटा डाला उसमे, और सम्मान के साथ दे दिया दोनों को, दोनों ने, दो दो सकोरे, खींच मारे! और फिर, मेहर ले गया उन्हें अपने साथ, ह...

2 years ago
Reply
RE: वर्ष २००९, हनुमानगढ़ की एक घटना

और सकुशल घर भी आ गए थे वो! पत्नी ने कोई कस न छोड़ी थी, "खुश करने में, फिर भी मन नहीं लग रहा था उनका, किसी तरह अलसाया हुआ वो, दिन काटा, और हुई शाम, ...

2 years ago
Page 378 / 634
error: Content is protected !!
Scroll to Top