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वो मेहर, वो मदिरा! सब याद आ गयी थी! अगला दिन हुआ, तो लगा बरसों बीत गए! अपनी मेहबूबा से मिले! दफ्तर पहुंचे, तो मन न लगे किसी भी काम में, कुर्सी पर, ...
और अगले दिन, अपना सामान उठा कर, वे भी चल दिए! शहर के लिए! जयपुर का ख्वाब लिए! दफ्तर में, जुगत-भिड़त लगानी थी, जयपुर हो जाए तबादला तो, जिंदगी का सबसे ब...
और आखिर में, हो गए खोखले! टेक दिए घुटने! दर्द, जो जा छिपा था, अब फिर से हावी हो गया! नूर ने, मदद की! लेकिन नूर का स्पर्श होते ही, झुलसने लगते थे...
और अब विदा लेनी थी! मन तो नहीं कर रहा था, लेकिन जाना भी आवश्यक था! तब, नूर ने बताया, कि कल सुबह चली जायेगी वो यहाँ से, अन्य साथियों के साथ, ये सुना, अ...
लेकिन ये कहाँ पता था उन्हें! वो तो बेचारे, जितना दम था उनमे, भिड़े हुए थे! दो बार में, अपनी सारी जवानी का जोश उतार बैठे थे! अब उठी नूर! बाहर गयी! बेचा...
और उसके अंग! चीख चीख कर जैसे, सूरज साहब से गुखार लगा रहे थे कि, उनको आज़ाद करो! पास आ बैठी! अब तो आवेश चढ़ना ही था! ऊपर से उसका लगाया हुआ, वो मा...
अब सड़क से मुड़े, और डाल दी साइकिल, उस रास्ते पर! तेज तेज! भागम-भाग! और दिखाई दी वो हवेली! जान में जान आ गयी! और अब दौड़ा दी साइकिल! आज तो नए...
अब तो! सर कनस्तर में, और हाथ कड़ाही में थे उनके! सूरज साहब के! लेकिन तभी आई घर की याद! वे उठे, और दरवाज़ा खोला, सुनसान पड़ी थी हवेली, शायद सो रह...
और जुटाई हिम्मत! देह में जहां जहां ताकत बची थी, बुला ली गयी 'एक' जगह! और रम गए फिर से! इस बार संघर्ष विकट हआ! आखिर संग्राम था ये, इसीलिए! ...
और चूर होते नूर के साथ! नर ने उस रात, बड़ी 'सेवा' की, हमारे सूरज साहब की! ऐसी सेवा, जो उन्हें अब इस जिंदगी में तो, शायद ही नसीब होती! उनका तो जी कर...
और रख लिए अपने ऊपर! अब बाकी का काम, उनके हाथ जानते थे ही! सभी आनंद ले रहे थे! फिर उस रक्काशा ने, अपने हाथ से मदिरा परोसी, और पिलाने लगे उन्हें म...
और फिर शराब लायी गयी! बेहतरीन शराब! वो परोसी गयी, साथ में सूखे मेवे आदि भी! सूरज साहब ने, खींच मारे दो गिलास! शराब थी या शहद मिला पानी! ऐसी शराब तो...
और डील डौल, किसी पहलवान की तरह था! ऊपर शरीर पर, सोने की मालाएं पहनी थीं, सोने के कड़े! और एक छोटी सी, कसी हुई कमीज, मर्दाना कंधे साफ़ दीख रहे थे...
और लोटे में से, वो अफीम का घोटा डाला उसमे, और सम्मान के साथ दे दिया दोनों को, दोनों ने, दो दो सकोरे, खींच मारे! और फिर, मेहर ले गया उन्हें अपने साथ, ह...
और सकुशल घर भी आ गए थे वो! पत्नी ने कोई कस न छोड़ी थी, "खुश करने में, फिर भी मन नहीं लग रहा था उनका, किसी तरह अलसाया हुआ वो, दिन काटा, और हुई शाम, ...
