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अब क्या किया जाए? उसने बात की दीपक साहब से, जब उन्हें पता चला तो, गश ही आने वाला था उन्हें तो, इन दिनों अंगद साहब की मधुमेह भी काफी गड़बड़ा गयी थी!...
और अपने दूसरे साथियों को बताया, वे भी आये, उन्होंने भी उस धसकती मिट्टी को देखा, वे भी हैरान! एक ने, एक और डंडा डाला, वो भी सीधा अंदर! अब घबराये वो, कि...
लेकिन वो अपने काम वाली जगह पर, चार दिन तक नहीं आया! अब तो मज़दूरों में फिर से भय छा गया! कई तो मना ही करने लगे, तभी उनको मनाने के लिए, वो ठेकेदार आया ...
बहुत खुशी मिली हो उसे! अब्ब न कोड़े की आवाज़ थी, और न वो गुस्सैल आदमी की गुर्राहट! फिर से जैसे उस औरत ने छलांग लगाई, धम्म! और ये धम्म की आवाज़, ...
आखिर में, ढोल के शोर से, एयर-गन की मदद से, वे चीलें उड़ाई गयीं! लेकिन अभी भी हमला कर ही देती थीं! अगला दिन आया, और उस दिन कोई चील नहीं दिखी! शायद, ...
हर अमावस को, देख लगा कर रखता हूँ मैं! वो रुमाल, मेरे पास है आज भी! वो हवेली, हनुमानगढ़! सब याद है मुझे! आज अमावस है! आज महफ़िल सजेगी! वही महफ़िल! वैसी...
और चिल्ला पड़े, "मैं नहीं जाऊँगा! मैं नहीं जाऊँगा!" नूर रो पड़ी, लिपट गयी उनसे, वे भी लिपट गए! ये कैसा मिलन था? कैसा प्यार? सूरज साहब अलग रोएँ, ...
उन्हें अफ़सोस था, लेकिन दुःख झेलने से फायदा क्या? मैंने यही पूछा, वे हंस कर टाल गए, "लेकिन बकौल मेहर, ये हवेली एक सेठ जी की है?" मैंने कहा, "हाँ, उ...
आलीशान कक्ष था उनका! किसी रजवाड़े जैसा! हम उस कक्ष में आ गए, हमें बिठाया गया, मदिरा ले आयीं वो कनीज़, मदिरा परोसी, और मुझे दी, मैंने आधा गिलास पिया, ...
और मंद मंद मुस्कुराने लगा! महफ़िल जवान थी अभी! हर तरफ शोर-शराबा था! मैंने घड़ी देखी, ढाई से अधिक का समय था! रात जवान थी अभी और इस रात में ये महफ़िल, अ...
रक्काशाएं थीं! सभी एक से बढ़कर एक! कुछ कनीजें भी थीं, वे सामान आदि लाती थीं! और एक तरफ खड़े हो, . हुक्म का इंतज़ार करती! एक रक्काशा, मुझे बेहद प...
और चुस्कियां भरते हुए, दोनों ही नशे करते रहे, एक मुंह से, एक आँखों से! और फिर हुआ 'विशेष' नाच! रक्काशाओं ने, अपने बदन को, कपड़ों से आजाद करने...
आज पुराने ज़माने की ऐय्याशी की महफ़िल थी! और फिर लोग आना शुरू हुए! कोई रजवाड़ा सा! कोई लड़ाका सा! कोई सैनिक! कोई पहलवान सा! और तो और, दो अंग्रेजी ब...
सूरज साहब बिदके! बेचैन हो उठे! मेहर मुस्कुरा उठा! सूरज साहब की जांघ पर हाथ मारा उसने! खड़ा हुआ, और उठा लिया सूरज साहब को! और ले गया साथ! मैं समझ गय...
