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ही चले आये थे! "चला जा यहां से, जा, चला जा!" एक औरत ने कहा, वो औरत, कोई साठ साल की रही होगी! ये सब, शर्मा जी नहीं देख पा रहे थे! वे द्विपाल मंत्र की ज...
क्या देखा, कि वो पेड़ नीचे धंस रहा है! पुरा कीकर का पेड़! कोई दो फीट धंसा, और फिर रुक गया, कमाल था! जमीन खा गयी थी उसको! प्रत्यक्ष-मंत्र लड़ाया था,...
भूमि में अनगढ़ पत्थर थे! बड़े बड़े! कुछ पत्थर तो बड़े विशाल थे! तभी कुछ स्तम्भ भी दिखे, ये मानव-निर्मित थे! अब कुछ समझ आया! यहां कोई निर्माण हुआ था, ब...
सुनी, ये किसी औरत की आवाज़ थी, वो किसी और औरत को, फुसफुसा कर कुछ बातें कर रही थीं, मैं चुपचाप लेटा रहा, न उठा, न गर्दन ही घुमायी, गौर से उनके शब्द पकड...
जा पहुंचे दिल्ली के इस कोने से, उस कोने तक! वहाँ पहुंचे, चाय पी, नाश्ता किया, और फिर चल पड़े हम! हम जा पहुंचे, निर्माण का सामान वहीं बिखरा पड़ा था,...
आये, बसंत विहार, रोहताश जी से बात हुई उनकी, सारा दुखड़ा रो दिया उनके सामने, रोहताश जी ने मदद करने का वायदा किया, और, मुझे याद है, वो कोई साढ़े सात ...
अट्टहास! महाप्रबल अट्टहास! "जा! बख्श देता हूँ! लौट के नहीं आना कभी! नहीं तो यहीं अंत हो जाएगा तेरा!" बोला वो! बाबा के सर पर तो अब, मृत्यु रुपी चण्ड...
अपना हाथ आगे किया, बाबा से कोई शक्ति टकराई, बाबा का त्रिशूल हाथ से गिर पड़ा! बाबा हैरान रह गए! बाबा जाप करते रहे, वो अट्टहास पर अट्टहास करता रहा! बाबा...
और बढ़ गए आगे! अब खुली चुनौती दी! खुली चुनौती! आमने सामने होने की! फिर से अट्टहास हुआ! प्रबल अट्टहास! प्रबल वायु-वेग चला! आँखों में मिट्टी घुसने लग...
प्राण-रक्षण क्रियाएँ निबटा ली थीं! बस अब तो उस ब्रह्म-राक्षस को चुनौती देनी थी! अपने चाकू से, मेढ़े का कलेजा उठाया, उसका एक टुकड़ा लिया, अलख में भूना,...
नहीं तो हम यहीं दफन होने वाले हैं! अच्छी ली ये जमीन हमने तो! अब घर भी बिकेगा, वो फार्म-हाउस भी, और हो सकता है सारी गाड़ियां भी बिक जाएँ! बुरे फंसे!...
कैसे? कहीं फिर ऐसा ही हुआ तो? कर्ज का क्या होगा? सोचें दोनों भाई! ठेकेदार अलग परेशान! माल वाले, पैसे मांग रहे हैं! क्या करें? किस घड़ी में काम प...
आँखें लाल उसकी! चेहरा लाल! चपाटे बेहाल! दोनों चपाटों को पकड़ लिया बालों से! अब बाबा जी हुए खड़े, अपना त्रिशूल अभिमंत्रित किया, और छुआ दिया लड़की...
और अब बताया उन सभी को, की उन्होंने जब वहाँ क्रिया की थी, और एक वृत्त खींचा था देखने के लिए, तो उन्हें एक त्रिशूल दिखाई दिया था, त्रिशूल के बड़े फाल पर...
और गाड़ी दौड़ा दी! अब्ब जो मंज़र उन्होंने देखा था, अब वो सब सच था! जैसा उन मज़दूरों ने बताया था! अब जान हलक में अटकी थी! न खाते बने, न फेंके बने! अस्प...
