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हम भी जा बैठे उनके समीप! बाबा ने मंत्र पढ़ा, चाकू अपना अलख में गर्म किया, और वो चाकू, छुआ दिया उस छोटे से सांप के गुप्तांग पर! सांप तड़प उठा। आठ का...
सांप बहुत विचलित हो गया था! और कोई आधे घंटे में उस करैत सांप के मुंह से झाग टपकने लगा! अब बाबा नहल नाथ उठे,और उस लोटे को उस पिंजरे से छुआ दिया, सां...
ताला भी लगा दिया था, ताकि कोई बालक-बालिका या अन्य इसको तंग न करे और कोई मुसीबत न आये, फिर वापिस हुआ और अपने कमरे में आ गया, भूप सिंह अभी तक नहीं आया थ...
और कोई भी सांप नहीं मिला, अभी वापिस आ ही रहे थे कि मेरी नज़र, एक पेड़ के पास पड़ी, उस पेड़ के नीचे एक सांप बैठा था, कुंडली मारे, शायद धूप सेंकने आय...
और मेरे बैग में से मेरा त्रिशूल ही ले आये, और दिया खींच के उसके हाथ पर! हाथ छूट गया और मैं पीछे जा गिरा! वो उठा और सीधा पानी में घुस गया! गोता लगाय...
अगले ही पल! पानी में हलचल हुई। बड़े बड़े साँपों ने अपनी गर्दन उठायी ऊपर! कम से काम सौ होंगे वो! बड़ा ही खौफनाक नजारा था वो! मैंने शर्मा जी को पीछे जान...
बढ़ा उसकी तरफ! वो पीछे हटा! अब हंसी बंद थी उसकी! शांत हो गया था बिलकुल! मैं भागा उसके पीछे, और वो भागा तालाब की तरफ। मैं पीछे पीछे और वो, आगे आगे! ...
वे हम मनुष्यों की तरह ही अपने संपोलों का, लालन-पालन करते हैं, वे संपोले भी, उनका वैसा ही आदर किया करते हैं जैसे कि हम अपने, माता-पिता अथवा बुजुर्गो...
और कुछ देर सुस्ताए, जल-पक्षी जल-क्रीड़ा में मग्न थे, मैं आगे गया, तालाब को देखा, तालाब गहरा था, बीच में पानी शांत था उसका, लहरें कम ही बन रही थीं, मैं...
और हमारी तरह ही, उसने सभी को ढूंढ निकाला था! मेरी ये योजना भी धरी की धरी रह गयी! कुछ हाथ नहीं लगा! भूप सिंह बड़ी धूर्तता से हम सभी को, छका रहा था! हम ...
ये क्या कारण है? कौन सा तर्क है यहां? क्या हो सकता है? ये पराक्ष-माया तो है, लेकिन समक्ष न रहने के बाद भी, कैसे काम कर रही है ये माया? बड़ा ही अजीब...
और फिर चाय-नाश्ता किया, आलू-पूरी का नाश्ता था, बढ़िया और लज़ीज़! दिन चढ़ा, भोजन किया, लेकिन भूप सिंह नहीं आया था अभी तक! इंतज़ार के अलावा और कोई विकल्...
सिंह?" मैंने पूछा, "गया होगा जंगल में" वे बोले, "रोज जाता है?" मैंने पूछा, "हाँ" वे बोले, "कब से?" मैंने पूछा, "एक साल हो गया" वे बोले, मैं चुप! ...
पसीना ऐसे बह रहा था कि, जैसे अभी नहा के आये हों! बस चली और हवा आई! पसीनों से वो लूटकराई तो ठंडी लगी! और बाद में वो लू ऐसी लगी जैसे कि कोई नश्तर! मै...
और फिर वापिस हुआ, अपने कमरे में पहुंचा, शालन अभी तक सोयी थी, अब जगा दिया मैंने उसे, वो जागी, नशे में थी, लड़खड़ा गयी, लेकिन मैंने वापिस भेज दिया उसको,...
