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और अचानक ही, वो पानी से बाहर निकल, दर्जनों सांप उसके शरीर पर लिपटे थे! सफ़ेद रंग के सांप! धारीदार! वो हंस रहा था और, न जाने कौन सी भाषा में बोले जा रह...
कोठे वाले वीर, शाह साहब वीर आदि आदि, इनका भी पूजन अति-आवश्यक है! लोग ये नहीं जानते, और शाबर मंत्र जपते चले जाते हैं! और अनजाने में ही अपने ऊपर मुसी...
और पराक्ष इसमें माहिर हुआ करते हैं, वो पराक्ष-कन्या कहाँ थी, ये भी नहीं मालूम था, अब एक कार्य करना था कि, भूप सिंह को छोड़ा जाए, वही निकाल सकता था सुर...
और जब इसके फूल टूट के गिरते हैं, तब वे डूब जाते हैं। कहते हैं, इतना रोटी है ये कुमुदनी कि, अपने आंसू का भार ही इसकोडुबो देता है! भरी गर्मी में भी, ...
और इन जंगलों का आदी भी था! वो कई कई किलो लकड़ियाँ ले आया करता था जंगल से! मेरा सामान उनसे तो हल्का ही था! हम दो घंटे में, उस तालाब के पास से हो कर गुज...
सिंह के पास. वो बंधा हुआ था! मुझे देख, बालकों की तरह से बिलखने लगा! अब मैंने खुलवाया उसको! लेकिन भागने नहीं दिया, कह दिया उन लोगों से, कि यदि ये ज़्या...
वैसा ही तापमान था! वैसी ही स्थूलता, और वैसा ही कामुक-भाव! "तवश्ला!" वो बोली, तवश्ला । इस नाम का अर्थ मैं आज तक नहीं जान पाया हूँ! और ये नाम मैंने उ...
और एक ने मेरी गरदन पर, पीछे की तरफ, हल्का सा काट लिया, लेकिन जो काटा था, वो बहुत तेज काटा था, जैसे कोई सुआं घुसेड़ दिया हो! वो नहीं बाज आ रही थी, मैंन...
जैसा लाल, किन्तु से मानव से सदा दूरी बना के रखते हैं। अभी भी कई ऐसी गुफाएं हैं वहाँ, जो आज तक खोजी नहीं जा सकी हैं, जंगल सघन है, पहुँचने का रास्ता ...
उनका रूप! रूप का बखान नहीं कर सकता मैं! किसी यक्षिणी के सौंदर्य के समान ही थीं! लगता था कि जैसे सूर्य-मंदिर कोणार्क में, खुदी हुई मूर्तियां साकार हो उ...
अभी तक भी वो पराक्ष कन्या नहीं आई थी! उसके रक्षक ही आ रहे थे! मैंने फिर से एक विद्या का संधान किया, ये विद्या भी बाबा ऋद्धा से ही सीखी थी! ये मातंग...
इसीलिए डर नहीं था! मैं आगे बढ़ता रहा और वो, वो आगे बढ़ा अब! हम दोनों रुक गए एक दूसरे के सामने! कोई पांच फ़ीट पर! उसकी आँखें मेरे सर के बराबर थीं! व...
और फिर पानी से बाहर आता, फिर गोता लगाता और बाहर आता, ऐसा ही खेल चलता रहा! मैं बेबस था कि क्या करूँ अब. तभी दिमाग में कुछ कौंधा! बाबा ऋद्धा की बतायी हु...
डाला हो उन्हें। "क्या हुआ था बाबा?" मैंने पूछा, उन्होंने साँसें नियंत्रित की, मुझे देखा, "नगरी, मुख, बहुत सारे" वो बोले, नगरी! इसका अर्थ था कि यहां नग...
और फिर पानी में एक कुआं सा बन गया! धुंआ सा उठा! सफ़ेद धुंआ! एक अजीब सी आवाज़ आ रही थी, एक ऐसी आवाज़, जैसे कि मानो दूर कहीं सारस बोल रहे हों, जैसे सड़क...
