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और अब मैंने अहिराक्ष का आह्वान करना आरम्भ किया! ये अहिराक्ष एक आसुरिक वीर है! सो का कट्टर और प्रबल शत्रु है! इसका भोग भी सर्प-मांस ही होता है! ये भक्ष...
कौशिकि लगने लगी थी! अभी हम सोच ही रहे थे, अलख में ईंधन झोंक रहे थे कि, मुझे अपने आसपास किसी की मौजूदगी का एहसास हुआ, लगा, कि कोई तो है जो हमारे ऊपर, न...
और कौशकि ने, ये असम्भव कार्य कर दिखाया था! मैं तो जैसे अब खाली हाथ ही था! मेरी हालत उस समय, एक मदारी के समान थी, जिसकी मदार- विद्या किसी और मदार-ज्...
और फिर वही आई निकल कर, शरीर का वर्ण लाल हो गया था उस क्रिया के प्रभाव से, वो क्रोध में थी, उसके संग वो रंगवल्लिका और दूसरी सखी सिंहपर्णिका भी थीं, वे ...
हाथों में थी, कौशकि तो बाज नहीं आ रही थी, मैंने उन सो को बहत त्रास दिया था लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा था, अब कुछ ऐसा करना था कि कौशकि मज़बूर हो जाए। कुछ...
और ये सुन, मैं ज़ोर से हंसा! "तेरे पराक्ष लोक में एक भी ऐसा पराक्ष नहीं जो मेरे टुकड़े करे! मैं चाहँ तो तुझे अभी अपनी जटाओं से बाँध सकता हूँ कौशकि! पह...
और मैं खड़ा खड़ा हँसता जा रहा था! ये अजीब नज़ारा देखे जा रहा था! और फिर वे रक्षक उड़े! सारे के सारे! वे पराक्ष-कन्याएं उड़ीं! वे पराक्ष-पुरुष उड़े!...
अब अलख पर बैठा मैं, सघन मंत्रोच्चार किया आरम्भ, बाबा नहुल नाथ भी, हाथ जोड़कर बैठ गए थे, और बाबा भूषण अलख में ईंधन झोंक रहे थे। मैंने अब एक महा-घातिनि ...
ढेर बन गया था साँपों का! लेकिन किनारे आकर भी, उनको चैन नहीं था! अभी तो शरीर फूलना था उनका! और फिर फट जाना था! और यही हुआ! साँपों के शरीर अब फूलने ल...
उसकी! इसी मुस्कान पर फ़िदा हो गया था वो भूप सिंह! अंजाम नहीं जानता था इस मुस्कान का! बहुत कंटीला प्रेम था! प्रेम न ही कहूँ तो उत्तम है, ये आकर्षण ही थ...
लेकिन उस समय मुझे उत्तर देना था, इसीलिए, आवाज़ कहाँ से आई, ध्यान नहीं देना था। मैं वहीं खड़ा रहा, हाँ, अपना त्रिशूल उठा लिया था मैंने अपने दोनों...
और तभी पानी उठा ऊपर! जैसे आकाश ने खींचा हो उसे, जैसे, ज्वार-भाटा सा आया हो उधर! पानी की बूंदें बिखरने लगी थीं! मेरे चेहरे और शरीर पर बूंदें पड़ रही थी...
इसका अर्थ भी जान गया था! रंगवल्लिका अर्थात पराक्ष में से नृत्य कन्या! "और उसका?" मैंने दूसरी की तरफ इशारा करते हुए पूछा, "सिंहपर्णिका" वो बोली, ये भी ...
ये तो कुछ कुछ नागदौत सा था! लेकिन नागदौत सफ़ेद होता है, ये लाल था, कुछ कुछ पीले रंग में, बसंती सा रंग था इस नागदौत का! "लो" वो बोली, मैंने हाथ में लिय...
कमर में पड़ी वो तगड़ी तो कमर को ही झुका देगी उनकी! कम से कम बीस किलो स्वर्ण तो रहा ही होगा! उनके चेहरे ऐसे सुंदर थे कि कल्पना से भी परे! आँखें, नाक...
