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अब हम चले गोरखपुर, बस पकड़ी, और चल पड़े, कमर फिर से धनुष बन गयी! और आखिर हम पहुँच ही गए गोरखपुर, वहाँ अब अपने जानकार के पास गए, वहीं ठहरे और वही...
* * * कोई आम घोड़ा नहीं! हंस हंस कर, बाबा छिद्दा तो लेट ही गए! हाथ जोड़ने लगे! कि बस! बस! अब बस! मेरा भी हाल खराब था हंस हंस कर! अब कभी दर...
आखिर में, ये विद्याएँ उसके संग ही क्षय हो जाती हैं! उड्डयन का आज यही हाल है! तबंग-विद्या भी लुप्तप्रायः है! कोडीश का भी! और उड़िया-चिड़िया का भी! ज...
हमे देखा तो बैठे बैठेही, हाथों से इशारा किया, वहाँ आने का, हम चल दिए आगे, पहुंचे वहाँ, वो पेड़ के नीचे एक चटाई पर बैठा था, उसके साथी घास में, उसने बैठ...
हमे देखा तो बैठे बैठेही, हाथों से इशारा किया, वहाँ आने का, हम चल दिए आगे, पहुंचे वहाँ, वो पेड़ के नीचे एक चटाई पर बैठा था, उसके साथी घास में, उसने बैठ...
और मित्रगण! कोई एक घंटे के बाद, असीम नाथ आया अपने साथ अपनी एक साधिका को लेकर! असीम नाथ कोई पचास वर्ष का रहा होगा, और उसकी साधिका कोई तीस बरस की, साधिक...
गया तभी, और हमने अब खाना खाया,रोटी भी थीं, चावल भी, माल्टा सारे खत्म हो गए थे, अब तो बस खटिया ही दिखाई दे रही थी! हम खड़े हए तब, और चल पड़े अपने कमरे ...
गोरखपुर जा पहुंचे, उस रात हम गोरखपुर में ही ठहरे थे अपने एक जानकार के यहाँ, वहीं खाना आदि खाया और फिर सोये, सुबह, चाय नाश्ता किया, और फिर भोजन, और ...
और आराम से पाँव पसार सो गए! तीन दिन बीत गए थे, महंत साहब का काम हो गया था, उनको फोन किया तो उसी रंग-बिरंगी चेली ने उठाया, अंग्रेजी में बात की उसने, मै...
सुबह नींद देर से खुली,आठ बजे थे, शर्मा जी उठ गए थे,और मैं भी उठा तब, दातुन-कुल्ला किया, और फिर स्नान, रात को मच्छर-समुदाय ने अच्छी खबर ली थी! बदन पर ज...
और उसके पीछे, सैंकड़ों पराक्ष प्रकट हुए! वो अग्निपिंड आकाश में ज्यों का त्यों खड़ा था! नाश करने के लिए, इन पराक्षों का अब हम हँसे! अट्टहास किया! वो पर...
भूमि में मारे तो कुँए बना दे! ऐसा प्रबल है ये अहिराक्ष, असुर बीर! अहिराक्ष ने, समूचा पराक्ष-कुनबा जैसे, शक्तिहीन कर दिया था! एक एक पराक्ष को, दण्ड दिए...
लेकिन रक्त कुंड में ये झाग, गाढ़े,अधिक देर तक ठहरने वाले, और स्थायी से लगते हैं! तालाब में, जगह जगह आग भड़क जाती थी! और तब, जहाँ अहिराक्ष खड़ा था, ...
और अचानक ही! वो तेज वायु, शांत हो गयी! वो काई, वो बौछारें, सब शांत हो चली! हमे अपने चारों ओर, गर्जना सी सुनाई देने लगी! अहिराक्ष आ चुका था वहाँ! हमारे...
