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वो मूर्ति लें चाहते थे और मैं, छोड़ नहीं रहा था! एक अजीब सा लगाव सा हो गया था, एक अजीब सा खिंचाव! सच कहता हूँ, न जाने कैसा अजीब खिंचाव था वो! शायद यही ...
और मान भी लिया जाए, तो कौमुदी क्यों देगी कोई मूर्ति?किसलिए?क्या औचित्य?"नहीं हुआ विश्वास" मैंने कह दिया!अब नहीं हुआ था तो कहना ही था!मैं बैठ गया वो मू...
वो एक मूर्ति थी, शुद्ध सोने की बनी हुई मूर्ति, और उस मूर्ति के साथ में ही एक और पोटली थी, छोटी सी, वो भी खोली, उसने से एक और पोटली सी निकली, वो भी खोल...
क्या हुआ इनको?ये तो मात्र किवदंती सी लगती है मुझे!सुना तो है, लेकिन बहुत कम! एक बार अपने दादा श्री के श्री मुख से! बाबा क्यों पूछ रहे हैं मुझसे?"कौमुद...
ही, उनके गुरु भी एक ही थे, बाबा अमर नाथ श्री श्री श्री महाबल नाथ के भी पुराने जानकार थे, और इसी कारण से मैं उनके सम्पर्क में आया था! और यही कारण था कि...
"तुमने ही बनाया?" मैंने पूछा, वो बचा हुआ टुकड़ा खाते हुए!"हाँ जी!" वो बोला,"क्या बात है!" मैंने कहा,"अच्छा लगा?" उसने पूछा,"अच्छा नहीं बहुत अच्छा!" मैं...
बढ़िया लगता था ऐसा!"ये नहीं रुकने वाली रात तक!" मैंने कहा,"यही लगता है" वे बोले,"चलो कोई बात नहीं, मौसम शानदार हो जाएगा!" मैंने कहा,"हाँ, यक़ीनन!" वे बो...
और तभी बिजली कड़की!उस स्थान को कंपा गयी!श्वान भौंके सामने मुंह करके! उनके लिए ये सहज नहीं था!तभी छतरी लिए और हाथ में केतली लिए सहायक आया!"चाय?" उसने पू...
थोड़ी देर बाद आये वापिस,"दे दी दवा?" मैंने पूछा,"हाँ, बाबा गिरि को ही दे दी" वे बोले,"ये ठीक किया" वे बोले,"अब यहाँ डॉक्टर कहाँ से आये!" वे बोले,"सही ब...
वे अपने अपने रास्ते हो लिए और हम अपने!शर्मा जी ने कपड़े उतारे रस्सी से और अब मैंने कक्ष खोला, अंदर गए, और बैठ गए, शर्मा जी ने अपने कपड़ों की तह लगाई और ...
थाली में, एक कटोरी में डाल, ज़ीरे और लहसुन के तड़के वाली मसूर की डाल थी, एक कटोरी में, आलू और पत्ता-गोभी की सब्जी थी, एक कटोरी में दही और साथ में अचार, ...
वे उठे, हाथ जोड़े, और चले गए बाहर,"अमर नाथ रुद्रपुर से आ रहे हैं?" शर्मा जी ने पूछा,"नहीं, गोरखपुर से" मैंने कहा,"ओह.." वे बोले,मैंने अपने जूते खोल लिए...
बस फ़र्क़ इतना कि वे सब जल में आहार ढूंढ रहे थे और हम सूखे में बैठे थे!शर्मा जी को चाय की तलब लगी! हम उठे, और चल दिए वापिस!हम आ गए वापिस उस स्थान पर, ये...
"कमर का हलुआ बन गया!" वे कमर पर हाथ रखते हुए बोले!"हाँ, कमर तीर-कमान हो गयी थी!" मैंने कहा,"और उस पर से भीड़!" वे बोले,"शुक्र है ठिकाने के लिए जगह मिल ...
