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खाना भी लगा दिया गया! खाना बढ़िया था! अच्छे से खाया, पैसे दिए, और अब चले वापिस! और इस तरह हम रात के दस बजे अपने स्थान पर पहुंच गए। वहां पहुंचे, तो पता...
वो रमास का पेड़, जड़ समेत, जल चुका था!अब कोई नामोनिशान नहीं था उसका!मेरी अलख, अब ठंडी पड़ चुकी थी!मैं ऊपर चढ़ा! बैठा वहां!और एक महामंत्र पढ़ा! युग्मा का मं...
मित्रगण!फिर कुछ प्रश्नोत्तर!और फिर उद्देश्य!ये कुछ गूढ़ प्रश्न होते हैं, लिख नहीं सकता यहां! हाँ, इसी में करीब पंद्रह मिनट लग गए होंगे!वो मुस्कुराई!और ...
युग्मा का आगमन हो चुका था!बस! इसी पल का तो इंतज़ार था मुझे!वातावरण में शीतलता छायी थी! जैसे ओंस गिर रही हो! मैं स्तब्ध सा खड़ा, वहीँ उस संकुचित प्रकाश-म...
अनुपम दृश्य था वो! इस संसार से सर्वथा पृथक! आँखें जो देख रही थीं उस पर यक़ीन करना सम्भव न था! और जो हो रहा था वो किसी भी तर्क-वितर्क से परे था! प्रकाश ...
और एक अति-सुंदर स्त्री में परिवर्तित हो गया!"यवः प्रवेश!" वो बोली!और लोप हुई!ओह!!!!!!!! पकड़ ली!पकड़ ली मैंने!!!!!!!!!अंतिम डोर पकड़ ली!मैं बढ़ गया था आगे...
ये क्या चमत्कार था!!मैं आगे पहुंचा, और मेरे सामने वही खूबसूरत इमारत थी! स्वर्ण से बनी थी शायद! मैं द्वार पर पहुंचा, फूल लगे थे आसपास! पीले रंग की दीवा...
उठ रहा था! वो करीब चार फ़ीट ऊपर उठा था, वो घूमा, और छलक के नीचे गिरा! वो जल, और उसकी बूँदें मेरे बदन पर पड़ीं! मेरी फुरफुरी छूट पड़ी! वो जल ऐसा था जैसे ब...
मैंने काँटा खींचा और क्या देखा!रक्त नहीं निकला था उसमे से!हैरत हुई मुझे!हाँ, मैं फिर से उस आवाज़ के पीछे चल पड़ा!जब आगे गया, तो आँखों ने विश्वास नहीं कि...
स्वर्ग का सा द्वार!यहाँ भी ज्योमितीय आकृतियाँ थीं कढ़ी हुईं!मैं अंदर गया, और जैसे ही अंदर पहुंचा, वहां एक बहुत बड़ा दीया जल रहा था! फूल बरस रहे थे छत से...
मैं खड़ा हुआ,हाथ जोड़े,और जैसे ही हाथ खोले, मेरे पीछे से फिर से एक आवाज़ आई,"जाओ, वहाँ जाओ" मैंने देखा कि आवाज़ किसने दी है!मैं पीछे मुड़ा,तो एक अद्वित्य स...
चाँद की चांदनी उनका श्रृंगार कर रही थी!लेकिन ये धन किसलिए?मैं खड़ा हुआ!और फिर बैठा गया!हाथ जोड़े!"नहीं! नहीं! धन नहीं चाहिए माँ! धन नहीं चाहिए!" मैं रो ...
मुकायना कर रही थीं! तभी वायु का वेग बढ़ा! और मेरी अख मेरे पेट तक जा पहुंची! मैंने फिर से अलख में ईंधन झोंका, और सामने देखा!"रन्ध्रा कौमिषः!!!" स्वर गूं...
वस्त्र से कस के ढके हुए थे! उन सभी के हाथों में, पात्र थे, उन पात्रों में कोई जल था, चारों ने, अलग अलग दिशा में वो जल बिखेरा था, और उसके पश्चात, वे फि...
