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कब सूरज निकले, कब दोपहर हुई और कब शाम, कुछ पता नहीं चला! मैं अर्ध-विक्षिप्त हालत में आ पहुंचा था! इस संसार का न होऊं, यही लग रहा था, मेरा कोई है, कोई ...
मुझे हर तरफ, कुछ ऐसी आवाज़ें आती थीं, जैसे घड़ों से पानी निकाला जा रहा हो!किसी के कंगन की आवाज़ें! पायेजेबों की आवाज़ें!जैसे मैं किसी रंगमहल में आ बैठा हो...
रात को नींद खुली, कोई सुबह का समय होगा,एक बिज्जू का जोड़ा आया था वहाँ! और मेरे पास जो मांस रखा था, वो साफ़ किये जा रहा था! मुझे देखता तो गुर्राता! अब कि...
आरपार!देह कोई दस फ़ीट ऊंची रही होगी!नग्न देह थी, पेट बाहर निकला था, बड़े बड़े स्तन नीचे लटके थे, गर्दन पर झुर्रियां पड़ी हुई थीं, नेत्र दिख नहीं रहे थे, प...
मैं फिर से वापिस हुआ! अलख पर पहुंचा,और जैसे ही बैठा, वो पेड़ झुक गया मेरे ऊपर!जैसे अभी टूट जाएगा! अब दिल धड़का! बहुत तेज!"कौन है???'' मैं चिल्लाया!कोई उ...
वहाँ अम्राक्षी के पुष्प पड़े थे! अम्राक्षी के पुष्प, गुलदाउदी जैसे होते हैं, लेकिन उनसे छोटे, रंग में महरून हुआ करते हैं, सूंघने पर, कच्चे आम की गंध आत...
वे मुंड, मेरे सामने गिरे! दोनों ही बिलख कर रो रहे थे! "कौन हैं आप?" मैंने पूछा,कहीं ये भी कि देवी न हों, जिनसे मैं अनजान हूँ अभी तक, इसीलिए सम्मान दिय...
भर के लिए भी ध्यान भंग हो जाए तो! फिर वो जीवित रहने वाला नहीं, और यदि रहा भी, तो समझिए मृत्यु मार्ग पर ही चलता है वो हमेशा, हड्डियां खोखली और भंगुर हो...
और स्वयं भी!मैं माँ कल्लड़-कुम्हारिन का नाद किया! जयनाद!मुझे क्षमा मिल गयी थी! मेरा अनाजने में किया गया अप्राद, क्षमा हो गया था! और तो और, अब माँ का आश...
खुरों की आवाज़ आई!कोई आ रहा था सामने!और जो सामने आया उसे देख मेरी रूह अंदर तक सनसना गयी!ये कल्लड़-कुम्हारिन थी! एक देवी! एक तामसिक देवी! एक ग्राम देवी! ...
के खुरों की आवाज़! आवाज़ बहुत स्पष्ट थी! लगता था जैसे कोई खुरों वाला जानवर आसपास घूम रहा हो, मैं साधना में आगे बढ़ रहा था, पहले तो सोचा कोई जानवर होगा, क...
स्तन सूखे हुए, झुक कर चलती हुई,यही थी!यही थी भूकंटा!अघोरियों की महाशत्रु!मैंने त्रिशूल उठाया, यमत्रास-मंत्र जपा! त्रिशूल अभिमंत्रित किया!और कर दिया सम...
मुझे देखा, जैसे सूंघा हो मुझे उसने!"जा! जा!" मैंने कहा!वो हंसने लगी!कानफोड़ू हंसी थी उसकी!मैंने अपना त्रिशूल उठाया! श्री महाऔघड़ का मंत्र पढ़ा! और कर दिय...
कोई दो बजे रात का समय हुआ होगा!मैं गहन मंत्रोच्चार में लीन था!कि सहसा, मुझे कुछ स्त्रियों के स्वर सुनाई दिए!ये मेरा भ्रम नहीं था! वे स्वर, मेरे पीछे स...
उसके बाद मुझे उस महासिद्धि में लग जाना था! महाक्रिया में! मैं आगे चला जा रहा था, और एक जगह बाबा गिरि रुक गए! अब यहां से मुझे आगे जाना था, वो मासू मुझे...
